लखनऊ नगर निगम में घुसपैठ की पड़ताल, बांग्लादेशी-रोहिंग्या सफाईकर्मियों की पहचान शुरू, पुलिस करेगी जांच

07 Nov 2025


>राजधानी लखनऊ में नगर निगम के आउटसोर्स सिस्टम पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम को मिली रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिक सफाईकर्मियों के रूप में काम कर रहे हैं, जो अपनी पहचान पश्चिम बंगाल या असम के निवासी के रूप में बताते हैं। इस संवेदनशील मामले पर तुरंत एक्शन लेते हुए नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने सभी ज़ोनल सेनेटरी अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि एक सप्ताह में समस्त सफाईकर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए और संदिग्ध कर्मियों की पहचान करके हटाया जाए।


>मेयर सुषमा खर्कवाल ने साफ संकेत दिया कि अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोमवार से वे स्वयं अभियान का नेतृत्व करेंगी और फील्ड में उतरकर जांच करेंगी। सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध सफाईकर्मियों की संख्या हजारों में हो सकती है। आरोप है कि कुछ ठेकेदार कम मजदूरी पर इनसे काम करवाकर लाभ कमा रहे हैं। स्थानीय सफाई कर्मचारी संगठनों ने भी कई बार इस मुद्दे को उठाया है, यह कहते हुए कि इससे स्थानीय कर्मचारियों का रोजगार प्रभावित हो रहा है।


>लखनऊ में कूड़ा संग्रहण और सफाई सेवाओं के लिए नगर निगम निजी कंपनियों को ठेका देता है। इन्हीं कंपनियों के माध्यम से बड़ी संख्या में सफाईकर्मी कार्यरत हैं।


>नगर निगम का आदेश:


>अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या व्यक्तियों को सफाई कार्य में प्राथमिकता देने के आरोपों पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि इससे स्थानीय लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। यह मुद्दा पहले भी नगर निगम की बैठकों और राजनीतिक मंचों पर उठता रहा है, लेकिन इस बार प्रशासन और पुलिस दोनों सक्रिय हो चुके हैं।