राजधानी लखनऊ के चिनहट स्थित महात्मा गांधी अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंचने वाले कई परिजनों ने आरोप लगाया है कि सामान्य प्रसव और ऑपरेशन के नाम पर ₹6 हजार की कथित मांग की जा रही है। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया तो मरीज की स्थिति का हवाला देकर उन पर मानसिक दबाव बनाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पीड़ित इरशाद ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी कहकशां बानो की डिलीवरी के दौरान अस्पताल कर्मियों ने ₹6 हजार की मांग की। उनका कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि यदि बाद में मरीज के टांकों में कोई समस्या आती है तो उसकी जिम्मेदारी उनकी होगी।
इरशाद का दावा है कि इस तरह की बातों से परिवार पर मानसिक दबाव बनाया गया, जिसके बाद उन्हें मजबूरी में रुपये देने पड़े। हालांकि उन्होंने इस मांग पर लगातार सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल को लेकर इस तरह के आरोप सामने आए हों। कुछ अन्य परिवारों ने भी प्रसव के दौरान अतिरिक्त रुपये मांगे जाने और दबाव बनाए जाने जैसी शिकायतें की हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल कथित अवैध वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों के अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
सरकार गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क प्रसव सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करती है। ऐसे में यदि किसी अस्पताल में मरीजों से पैसे मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।
मामले में अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं। यदि विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। वहीं यदि शिकायतें सही साबित होती हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभागीय जांच और अस्पताल का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।