गरीबों के नाम पर खुलते थे बैंक खाते... फिर करोड़ों रुपये पहुंच जाते थे विदेश, लखनऊ में चौंकाने वाला नेटवर्क बेनकाब

12 Jul 2026

लखनऊ। देशभर में साइबर ठगी से वसूली गई रकम को गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बैंक खातों के जरिए विदेश भेजने वाले एक संगठित नेटवर्क का लखनऊ पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ऐसे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था जिन्हें आसान कमाई का लालच दिया जाता था। बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से आई रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी साइबर अपराधियों तक भेजने के लिए किया जाता था।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि सबसे पहले इन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग माध्यमों से निकालकर या फिर यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर विदेशी डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के बदले गिरोह के सदस्यों को प्रत्येक लेनदेन पर कमीशन मिलता था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न जिलों में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के तुरंत बाद एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, पंजीकृत मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग की आईडी और पासवर्ड अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद खाताधारक अपने ही खाते का संचालन नहीं कर पाता था और पूरा नियंत्रण गिरोह के पास चला जाता था। इन्हीं खातों को साइबर अपराध की भाषा में "म्यूल अकाउंट" के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जिनके जरिए साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए रहते थे। जैसे ही किसी खाते में साइबर ठगी की रकम पहुंचती, उसे तुरंत यूएसडीटी में बदलकर विदेशी डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता था। इससे धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए अधिक कठिन हो जाता था।

पूछताछ के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरोह के सदस्य आज़म और अब्दुल नाम के व्यक्तियों के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़े थे। पुलिस के अनुसार पूरे नेटवर्क में प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी पहले से तय थी और उसी के आधार पर कमीशन का बंटवारा किया जाता था। जांच एजेंसियां अब इन दोनों सहित अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही हैं।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में बैंकिंग और डिजिटल उपकरण बरामद किए। इनमें 50 एटीएम और क्रेडिट कार्ड, 3 चेकबुक, 2 पासबुक, 1 टैबलेट, 1 आईपैड, 53,100 रुपये नकद, एक कार, एक मोटरसाइकिल शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों का रिकॉर्ड, डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और टेलीग्राम चैट का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि विदेशी साइबर अपराधियों से नेटवर्क का संपर्क किस स्तर तक था और साइबर ठगी से अर्जित धन का अंतिम लाभार्थी कौन था। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की वित्तीय श्रृंखला और इससे जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।