>साइबर ठगों की शातिर चालों का शिकार इस बार राजधानी लखनऊ के एक प्रतिष्ठित चमड़ा व्यवसायी बने हैं। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी और फिर CBI अफसर बताकर व्यवसायी को “डिजिटल अरेस्ट” में लिया और दो दिन तक डर का ऐसा माहौल बनाया कि पीड़ित ने 47 लाख रुपए उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
मुंबई के अंधेरी थाने का नाम लेकर बनाया दबाव
>विनयखंड निवासी व्यवसायी रविंद्र वर्मा के मुताबिक, 20 जून की सुबह 10:30 बजे एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई अंधेरी थाने का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है, जिसके चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है।
वीडियो कॉल पर “पुलिस अफसर”, फिर CBI अधिकारी बना डर का हथियार
>कुछ देर बाद रविंद्र को एक वीडियो कॉल आई जिसमें सामने एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नजर आया। उसने दावा किया कि रविंद्र मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी हो चुके हैं। लेकिन गिरफ्तारी से पहले “डिजिटल अरेस्ट” का मौका दिया जाएगा बशर्ते वो किसी को इस बारे में जानकारी न दें।
>ठगों ने उन्हें एक कमरे में अकेले बैठने और वीडियो कॉल चालू रखने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बैंक खातों की डिटेल मांगी और कहा कि अब CBI अधिकारी उनसे पूछताछ करेंगे।
दो दिन में दो खातों में उड़ाए 47 लाख रुपए
>21 जून को कथित CBI अधिकारी ने रविंद्र को चिनहट स्थित इंडसइंड बैंक ब्रांच भेजा और वहां से दो अलग-अलग खातों में 47 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए। पीड़ित को यह भी कहा गया कि पूछताछ पूरी होने के बाद सारी राशि उन्हें वापस मिल जाएगी।
बेटी को बताया, तब खुली ठगी की सच्चाई
>पीड़ित को संदेह हुआ तो उन्होंने घटना की जानकारी अपनी बेटी को दी। बेटी की समझदारी से मामला सामने आया और परिवार ने तुरंत साइबर थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।