लखनऊ डबल मर्डर-सुसाइड: मानस के पास दो पिस्टल और तमंचा, असलहा देने वाले की तलाश

23 Aug 2026

लखनऊ के गोमतीनगर में बैंक मैनेजर दिव्या मिश्रा की हत्या, इसके बाद उनकी बहन की गोली मारकर हत्या और फिर मानस की खुदकुशी के मामले की जांच अब हथियारों के स्रोत तक पहुंचने पर केंद्रित है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मानस अपने साथ दो पिस्टल और एक तमंचा लेकर आया था। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये हथियार उसे कहां से मिले और उन्हें उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति कौन था।

जांच टीम मानस के मोबाइल फोन से जुड़े रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, सेव नंबर, चैट और अन्य संपर्कों की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले मानस किन लोगों के संपर्क में था और हथियार हासिल करने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग उसके संपर्क में आए थे।

पुलिस के मुताबिक, हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की पहचान इस मामले की जांच में अहम कड़ी हो सकती है। फिलहाल टीम उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और अन्य साक्ष्यों को एक साथ जोड़कर घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।

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जांच में सामने आए इस तथ्य ने मामले में हथियारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मानस के पास मौजूद दो पिस्टल और एक तमंचा कहां से आए थे।

जांच का एक प्रमुख हिस्सा इन हथियारों के स्रोत की पहचान करना है। पुलिस यह भी देख रही है कि तीनों असलहों का इस्तेमाल किस तरह हुआ और क्या वे सभी एक ही स्रोत से हासिल किए गए थे। इसके लिए उपलब्ध साक्ष्यों और हथियारों से जुड़ी जांच को आपस में जोड़ा जा रहा है।

फिलहाल पुलिस हथियारों की फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरी कड़ी तैयार कर रही है। मानस तक हथियार पहुंचने की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस उसकी कॉल डिटेल और मोबाइल में मौजूद संपर्कों की जांच कर रही है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात से पहले मानस की किन लोगों से बातचीत हुई थी।

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मोबाइल में सेव नंबरों और चैट को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस घटना से पहले के संपर्कों और संवादों को देखते हुए यह समझने का प्रयास कर रही है कि मानस ने हथियारों की व्यवस्था कब और किसके माध्यम से की।

जांच टीम इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि घटना से पहले मानस की गतिविधियां कैसी थीं और वह किन लोगों के संपर्क में था। मोबाइल डेटा से मिलने वाली जानकारी को दूसरे साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखा जा रहा है।

इस मामले में ऑटो चालक मुकेश का बयान भी पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चालक के मुताबिक, उसने घटनाक्रम के दौरान मानस को देखा था। उसके अनुसार मानस के पास हथियार थे और उसने पिस्टल के बल पर उसे घर ले जाने के लिए मजबूर किया।

पुलिस अब ऑटो चालक के बयान की अन्य साक्ष्यों से पुष्टि कर रही है। जांच टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि मानस किस समय ऑटो में बैठा, उसकी गतिविधियां कैसी थीं और उसके पास मौजूद हथियारों के बारे में चालक ने वास्तव में क्या देखा। इससे घटनाक्रम की समयरेखा समझने में भी मदद मिल सकती है। पुलिस बयान में सामने आई जानकारी का मिलान उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से कर रही है।

घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी पुलिस जांच में शामिल किया गया है। टीम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए मानस की गतिविधियों और आवाजाही से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज, ऑटो चालक के बयान और मोबाइल डेटा को अलग-अलग स्तर पर जांचने के बाद उन्हें आपस में मिलाया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य घटनाक्रम की कड़ियों को क्रमवार जोड़ना और यह पता लगाना है कि वारदात से पहले मानस की गतिविधियां क्या थीं।

जांच टीम ने दिव्या और मानस के साथ काम करने वाले सहकर्मियों के बयान भी दर्ज किए हैं। पुलिस दोनों के संबंधों, उनके बीच किसी विवाद और घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है।

सहकर्मियों से यह भी पूछा गया कि पिछले कुछ दिनों में मानस के व्यवहार में कोई बदलाव दिखाई दिया था या नहीं। इसके अलावा, क्या उसने किसी विवाद, तनाव या अन्य परिस्थिति के बारे में किसी से बातचीत की थी, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस इन बयानों को मोबाइल डेटा और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मिलाकर देख रही है, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

मानस के पास दो पिस्टल और एक तमंचा होने के कारण पुलिस के सामने इन हथियारों की जांच भी अहम है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियार कहां से आए और क्या इनका उपयोग अलग-अलग घटनाओं में हुआ था।

हथियारों की फोरेंसिक जांच से मिलने वाली जानकारी को घटनास्थल और अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़ा जा रहा है। पुलिस हथियारों और घटना के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।

इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह निर्धारित करना है कि उपलब्ध हथियारों का घटनाक्रम में क्या इस्तेमाल हुआ और उनसे जुड़े साक्ष्य किस तरह घटना की दूसरी कड़ियों से जुड़ते हैं।

जांच के इस चरण में पुलिस के सामने सबसे प्रमुख सवाल यह है कि मानस तक इतने हथियार कैसे पहुंचे और उन्हें उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति कौन था। कॉल डिटेल, मोबाइल संपर्क और चैट की जांच इसी सवाल का जवाब तलाशने की दिशा में की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियार हासिल करने से पहले मानस किन लोगों से संपर्क में था।

असलहे उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की पहचान होने पर पुलिस को घटना से पहले मानस की गतिविधियों और हथियारों की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी मिल सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी पुलिस की जांच जारी है और हथियारों के स्रोत की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल पुलिस इस मामले में कई स्रोतों से प्राप्त जानकारी को एक साथ जोड़ रही है। दिव्या और मानस के संपर्क में रहे लोगों के बयान, ऑटो चालक की जानकारी, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और हथियारों से जुड़े साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं।

इन सभी तथ्यों की आपस में पुष्टि की जा रही है, ताकि घटनाक्रम का क्रम स्पष्ट किया जा सके। पुलिस विशेष रूप से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वारदात से पहले मानस की गतिविधियां क्या थीं और उसके पास मौजूद हथियारों की व्यवस्था किस माध्यम से हुई।

जांच फिलहाल इसी दिशा में आगे बढ़ रही है कि हथियारों के स्रोत और मानस के संपर्कों की पहचान के जरिए घटना से पहले की गतिविधियों की पूरी कड़ी स्थापित की जा सके।