लखनऊ में आखिर कहां बन रहीं नकली दवाएं? तीन साल में बार-बार कार्रवाई, फिर भी नहीं टूट रहा सप्लाई नेटवर्क

09 Jul 2026

राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं की लगातार हो रही बरामदगी अब अलग-अलग घटनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। बुधवार को एक बार फिर विभिन्न ब्रांड की नकली दवाओं के मिलने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर इन दवाओं का निर्माण कहां हो रहा है और इन्हें बाजार तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कैसे लगातार सक्रिय बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में करोड़ों रुपये की नकली दवाएं पकड़े जाने, कई छापेमारी और बड़े खुलासों के बावजूद यह अवैध कारोबार पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा।

बुधवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई में जिन दवाओं की बरामदगी हुई, उनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लिवर रोग और एंटीबायोटिक जैसी ऐसी दवाएं शामिल हैं जिनका उपयोग बड़ी संख्या में मरीज रोजाना करते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि नकली दवाओं का नेटवर्क उन दवाओं को निशाना बना रहा है जिनकी बाजार में सबसे अधिक मांग रहती है और जिनकी बिक्री बड़े पैमाने पर होती है।

राजधानी में पिछले तीन वर्षों के दौरान नकली दवाओं के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की गई, लेकिन हर कुछ महीनों बाद नए ठिकानों से इसी तरह के मामलों का सामने आना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दुकानों या गोदामों पर छापेमारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक नकली दवाओं के उत्पादन केंद्रों और पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचकर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे गिरोह नए नाम, नए ठिकानों और नए माध्यमों से दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।

चिकित्सकों के अनुसार नकली दवाओं में कई बार आवश्यक सक्रिय तत्व (एक्टिव इंग्रीडिएंट) नहीं होता या उसकी मात्रा निर्धारित मानकों से कम अथवा अधिक होती है। ऐसी स्थिति में दवा अपेक्षित असर नहीं करती और मरीज की बीमारी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में नकली या घटिया गुणवत्ता की दवा लेने से दवा प्रतिरोध (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) का खतरा बढ़ सकता है। वहीं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए गलत दवा जानलेवा भी साबित हो सकती है।

एफएसडीए की टीम ने बुधवार देर रात तक अमीनाबाद समेत कई इलाकों में अभियान चलाया। अधिकारियों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बरामद दवाएं कहां तैयार की गईं और किन माध्यमों से बाजार तक पहुंचाई गईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों को दवा खरीदते समय कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।

राजधानी में नकली दवाओं के खिलाफ कई अहम कार्रवाई पहले भी हो चुकी हैं।

अगस्त 2023: अमीनाबाद और बस स्टेशन क्षेत्र से दो करोड़ रुपये मूल्य की 65 हजार से अधिक नकली गोलियां बरामद की गईं।

नवंबर-दिसंबर 2023: अमीनाबाद स्थित एक दवा प्रतिष्ठान पर छापेमारी के दौरान नकली दवाएं मिलीं। जांच में नेटवर्क के तार आगरा, चेन्नई और पुडुचेरी तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई।

जून 2025: काकोरी क्षेत्र में लगभग 1.2 करोड़ रुपये मूल्य की नकली ऑक्सीटोसिन दवाएं और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई।

31 अगस्त और 1 सितंबर 2025: पारा क्षेत्र में करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की नकली ऑक्सीटोसिन फैक्टरी का भंडाफोड़ किया गया।

22 दिसंबर 2025: नकली दवाओं का मुद्दा विधानसभा में उठा, जहां सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) और गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई का भरोसा दिया।

जनवरी-फरवरी 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोडीन आधारित कफ सिरप सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 28.5 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की।

14 फरवरी 2026: विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने कोडीन आधारित कफ सिरप गिरोह के मुख्य आरोपी अमित यादव को गिरफ्तार किया।