राजधानी लखनऊ में फुटपाथ पर माता-पिता के साथ सो रही डेढ़ साल की मासूम बच्ची के अपहरण का मामला महज कुछ घंटों में बच्चा चोरी के एक संगठित गिरोह तक जा पहुंचा। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि बच्ची को कथित तौर पर ढाई लाख रुपये में बेचने की तैयारी थी। चौक पुलिस और डीसीपी पश्चिम की क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया और इस मामले में एक डॉक्टर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
यह घटना 13 जुलाई की देर रात चौक थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, बच्ची अपने माता-पिता के साथ फुटपाथ पर सो रही थी। इसी दौरान आरोपी चुपचाप उसे उठाकर फरार हो गए। सुबह जब परिजनों की नींद खुली तो बच्ची गायब थी। सूचना मिलते ही चौक थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस कमिश्नरेट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई विशेष टीमें गठित कर दीं।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे करीब 150 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही सर्विलांस, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई। लगातार जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
इसके बाद थाना चौक पुलिस और डीसीपी पश्चिम की क्राइम टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से अपहृत मासूम को सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बच्ची को कथित तौर पर ढाई लाख रुपये में बेचने की तैयारी थी। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते उनकी योजना पूरी नहीं हो सकी और बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया।
पुलिस का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि बच्ची को किसे और कहां बेचा जाना था। संभावित खरीदारों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ऋषभ कश्यप, रोहित पासी, मोहम्मद सुल्तान, मोहम्मद इरशाद शाह और श्याम जी यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में एक डॉक्टर भी शामिल है। मामले में उसकी भूमिका की अलग से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गिरोह पहले भी बच्चों के अपहरण या मानव तस्करी जैसी वारदातों में शामिल रहा है या नहीं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह मामला संगठित गिरोह से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। इसी वजह से पूरे नेटवर्क, संभावित खरीदारों और अन्य सहयोगियों की पहचान के लिए जांच का दायरा बढ़ाया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मानव तस्करी सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।