राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर का असर शहर के कुछ प्रमुख इलाकों में दिखाई देने लगा है। गोमती नगर एक्सटेंशन क्षेत्र में बुधवार शाम स्थिति में बदलाव देखने को मिला, जिसके बाद इकाना स्टेडियम से प्लासियो की ओर जाने वाले मार्ग पर पानी पहुंच गया। इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही फिलहाल धीमी गति से संचालित की जा रही है। मौके पर यातायात पुलिस की टीम मौजूद है और वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वाहन चालकों से भी सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और गति नियंत्रित रखने की अपील की गई है।
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बुधवार शाम इकाना स्टेडियम से प्लासियो की ओर जाने वाले मार्ग पर पानी भर गया। इससे इस मार्ग पर यातायात की गति प्रभावित हुई है। यातायात पुलिस ने स्थिति को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। इस मार्ग पर फिलहाल यातायात पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि वाहनों को धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। यातायात पुलिस की टीम मौके पर रहकर वाहनों की आवाजाही को सुचारु और सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्थाएं कर रही है। वाहन चालकों को पानी वाले हिस्से में सावधानी से वाहन चलाने और अनावश्यक रूप से मार्ग पर रुकने से बचने की सलाह दी गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसी मार्ग पर सोमवार को भी पानी भर गया था। उस समय कई पंप लगाए गए थे, जिसके माध्यम से पानी को बाहर निकालने का काम किया गया। इसके बाद मंगलवार तक स्थिति को नियंत्रित किया गया था। हालांकि, बुधवार को गोमती नदी का जलस्तर फिर बढ़ने के साथ इकाना स्टेडियम से प्लासियो की ओर जाने वाले मार्ग पर पानी पहुंच गया। इसके बाद यातायात पुलिस को मार्ग पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करनी पड़ी। यह क्षेत्र गोमती नगर एक्सटेंशन में आता है और इकाना स्टेडियम की वजह से यहां खेल आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है।
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मार्ग पर पानी भरने के बाद लखनऊ यातायात पुलिस की ओर से वाहन चालकों के लिए सावधानी बरतने की अपील की गई है। पुलिस टीम मौके पर मौजूद है और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। वाहन चालकों से कहा गया है कि वे पानी वाले मार्ग पर गति नियंत्रित रखें और सावधानीपूर्वक वाहन चलाएं। इसके अलावा अनावश्यक रूप से उक्त मार्ग पर रुकने से बचने की सलाह दी गई है। यातायात पुलिस की मौजूदगी का उद्देश्य पानी के कारण प्रभावित मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना और लोगों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में सहायता करना है।
गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नदी का पानी ट्रिपल आईटी परिसर तक भी पहुंच गया है। परिसर में बाढ़ के खतरे को देखते हुए करीब 100 छात्र-छात्राओं को तत्काल कैंसर संस्थान के रेजिडेंट में स्थानांतरित किया जा रहा है। छात्रों को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की प्रक्रिया जलस्तर बढ़ने के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए की जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद ट्रिपल आईटी परिसर और आसपास के क्षेत्र में भी नदी के बढ़ते पानी पर नजर रखी जा रही है।
लखनऊ में गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर का असर भैसाकुंड बैकुंठ धाम में भी दिखाई दे रहा है। यहां गोमती नदी का पानी चबूतरों तक पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण चबूतरे पानी में डूबे हुए हैं। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दाह संस्कार के लिए लकड़ी को चबूतरों तक पहुंचाने में भी दिक्कत हो रही है। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राख और अस्थियों को सुरक्षित रखने को लेकर भी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई परिवार दाह संस्कार पूरा होने तक मौके पर मौजूद रहते हैं, ताकि पानी के बीच से अस्थियां जुटाई जा सकें।
🚨 ट्रैफिक अलर्ट | लखनऊ इकाना स्टेडियम से प्लासियो की ओर जाने वाले मार्ग पर गोमती नदी का पानी भरने के कारण यातायात धीमी गति से संचालित हो रहा है। 🚦 यातायात पुलिस की टीम मौके पर मौजूद है तथा यातायात को सुचारु एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। 🙏 वाहन चालकों से अपील है कि सावधानीपूर्वक वाहन चलाएं, गति नियंत्रित रखें तथा अनावश्यक रूप से उक्त मार्ग पर रुकने से बचें। #TrafficAlert #LucknowTraffic
— LUCKNOW TRAFFIC POLICE (@lucknowtraffic) October 7, 2026
भैसाकुंड बैकुंठ धाम में पानी चबूतरों तक पहुंचने से अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। दाह संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी को चबूतरों तक ले जाना मुश्किल हो गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण उन स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है जहां सामान्य परिस्थितियों में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके साथ ही दाह संस्कार के बाद राख और अस्थियों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।