लखनऊ में एच1एन1 के 11 नए मरीज, सक्रिय मामले 73; जानें कब जरूरी है आरटी-पीसीआर

11 Sep 2026

लखनऊ में इन्फ्लुएंजा-ए एच1एन1 के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की स्थिति के आधार पर जांच और उपचार से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 को जनपद में एच1एन1 के 11 नए मरीज पाए गए। इनमें एक मरीज अस्पताल में भर्ती है, जबकि 10 मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। जनपद में सक्रिय मामलों की संख्या 73 बताई गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गंभीर लक्षण वाले मरीजों को सामान्य लक्षण वाले मरीजों से अलग श्रेणी में रखते हुए आवश्यक जांच और उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से प्राप्त गाइडलाइन के अनुसार गंभीर लक्षण दिखाई देने पर रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच कराई जानी चाहिए और आवश्यकता होने पर मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

जनपद में 11 सितंबर को एच1एन1 के 11 नए रोगी पाए गए। स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार इनमें से एक मरीज अस्पताल में भर्ती है, जबकि 10 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जनपद में सक्रिय मामलों की संख्या 73 बताई है। उपलब्ध जानकारी में पहले अस्पताल में भर्ती रहे 29 मरीजों का भी उल्लेख है, जिनमें 27 मरीज स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। मरीजों की स्थिति के अनुसार अस्पताल में भर्ती करने, होम आइसोलेशन में रखने और जांच कराने का निर्णय चिकित्सकीय स्थिति तथा लक्षणों के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।

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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की गाइडलाइन के अनुसार तेज बुखार के साथ कुछ विशेष लक्षण दिखाई देने पर मरीज को गंभीर श्रेणी में रखा जाना चाहिए। इनमें सीने में दर्द, बेहोशी, रक्तचाप कम होना, सांस फूलना, नाखूनों का नीला पड़ना और बलगम में खून आना शामिल हैं। ऐसे मरीजों की रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच कराने की सलाह दी गई है। आवश्यकता के अनुसार उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। इसका उद्देश्य मरीज की स्थिति के अनुसार समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर लक्षण वाले मरीजों को केवल सामान्य फ्लू के लक्षणों की श्रेणी में न रखने और चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह के अनुसार जिन मरीजों को पहले से कोई गंभीर या पुरानी बीमारी है और उनकी स्थिति बिगड़ने लगे, उन्हें भी गंभीर श्रेणी में रखा जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता देने की सलाह दी गई है। गाइडलाइन में पहले से मौजूद गंभीर बीमारी की स्थिति बिगड़ने को भी उपचार संबंधी निर्णय में महत्वपूर्ण माना गया है। इस श्रेणी में आने वाले मरीजों की स्थिति की चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यकता के अनुसार जांच एवं अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है।

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इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों से पीड़ित बच्चों के मामले में भी स्वास्थ्य विभाग ने कुछ विशेष संकेतों को गंभीर बताया है। इनमें असामान्य उनींदापन या अत्यधिक सुस्ती, लगातार तेज बुखार, भोजन या तरल पदार्थ लेने में असमर्थता, झटके आना, तेज सांस चलना और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। गाइडलाइन के अनुसार ऐसे गंभीर लक्षण वाले बच्चों की रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच कराई जानी चाहिए। आवश्यकता होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बुखार, जुकाम, गले में खराश, खांसी या फ्लू जैसे सामान्य लक्षण होने पर मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए और आवश्यक उपचार कराना चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार सामान्य लक्षण वाले मरीजों के लिए रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच आवश्यक नहीं है। ऐसे मरीजों को घर पर पर्याप्त आराम करने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेने की सलाह दी गई है। साथ ही संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के निकट संपर्क से बचने की सलाह दी गई है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा डायबिटीज, रक्त और तंत्रिका संबंधी विकार सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन लोगों से संक्रमण की स्थिति में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और संक्रमित या इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाले व्यक्ति को उनसे दूरी बनाए रखनी चाहिए। यह सलाह संक्रमण की स्थिति में ऐसे संवेदनशील लोगों के निकट संपर्क को कम करने के उद्देश्य से दी गई है।

इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाले मरीजों के उपचार के दौरान संक्रमण नियंत्रण के मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में मरीजों की स्क्रीनिंग, जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण से बचाने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार मरीज की स्थिति के आधार पर अलग व्यवस्था और संक्रमण नियंत्रण संबंधी उपाय किए जाने हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए कई सामान्य सावधानियां भी बताई हैं। इनमें मास्क पहनना और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना शामिल है। खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या कपड़े से ढकने की सलाह दी गई है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने और आंख, नाक तथा मुंह को बार-बार छूने से बचने के लिए भी कहा गया है। बुखार और बदन दर्द होने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा लेने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण से बचाव के लिए कुछ गतिविधियों से बचने की भी सलाह दी है। लोगों को हाथ मिलाने और निकट संपर्क वाले अभिवादन से बचने के लिए कहा गया है। सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकने की सलाह दी गई है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन नहीं करने को कहा गया है। अस्वस्थ होने पर अन्य लोगों के साथ बैठकर भोजन करने से बचने की सलाह भी दी गई है।