>लखनऊ अब दिल्ली, मुंबई और नोएडा जैसे महानगरों की तर्ज पर ऊंची इमारतों के नए युग में प्रवेश कर चुका है। शहीद पथ के किनारे जल्द ही 38 से 42 मंजिला टॉवर्स लखनऊ की स्काईलाइन को नया रूप देने जा रहे हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस दिशा में तीन निजी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनमें से दो में निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है।
>इस परिवर्तन की सबसे अहम वजह है एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) नीति में किया गया बड़ा संशोधन। पहले जहां एफएआर की सीमा 2.5 थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर अधिक निर्माण क्षेत्र की अनुमति दी गई है। इसका अर्थ है कि एक ही भूखंड पर अब दोगुना निर्माण किया जा सकेगा, जिससे मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स की नई लहर चल पड़ी है।
>फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) तय करता है कि किसी प्लॉट पर अधिकतम कितना निर्माण हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी प्लॉट का आकार 1000 वर्ग मीटर है और एफएआर 2.0 है, तो वहां 2000 वर्ग मीटर तक का निर्माण संभव होगा। नए नियमों के तहत अब बिल्डरों को 35 से 42 मंजिला इमारतें बनाने की इजाज़त दी जा रही है
>LDA की यह नई एफएआर नीति शहीद पथ, गोमती नगर और विभूति खंड जैसे हाई-डिमांड क्षेत्रों में लागू की गई है। इन इलाकों में रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की गगनचुंबी इमारतों की भारी मांग है। हाईराइज बिल्डिंग्स अब इन क्षेत्रों की पहचान बनने वाली हैं।
>LDA ने कुछ मामलों में अतिरिक्त एफएआर की भी छूट दी है मगर इसकी शर्तें सख्त हैं।
जैसे:
- पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीक अपनाना
- ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन
- सौर ऊर्जा का उपयोग
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था
- और आग से सुरक्षा, पर्याप्त पार्किंग, तथा अन्य आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना
>इन मानकों को अपनाने पर बिल्डरों को अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी जा रही है। इसका उद्देश्य है स्मार्ट, सुरक्षित और सतत विकास।