राजधानी लखनऊ के चिनहट स्थित हिमालय कोल्ड स्टोरेज में रविवार सुबह लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। सुबह करीब छह बजे शुरू हुई यह आग देखते ही देखते विकराल रूप लेती चली गई और सात घंटे तक लगातार धधकती रही। आग इतनी भयावह थी कि घने धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई देता रहा, जबकि बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन को दयाल रेजिडेंसी समेत आसपास के रिहायशी इलाके एहतियातन खाली कराने पड़े।




घटना ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब आग के दौरान अत्यधिक गर्मी और अंदर बने दबाव के बीच कोल्ड स्टोरेज की एक अंदरूनी दीवार भरभराकर गिर गई। इससे राहत एवं बचाव अभियान कुछ समय के लिए और चुनौतीपूर्ण हो गया। हालांकि दमकल विभाग ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए अभियान जारी रखा और करीब सात घंटे की लगातार मशक्कत के बाद आग पर लगभग काबू पा लिया। फिलहाल मौके पर कूलिंग ऑपरेशन जारी है ताकि दोबारा आग भड़कने की कोई संभावना न रहे।
रविवार सुबह शुरू हुए इस अग्निकांड से पूरे इलाके में दहशत का माहौल रहा। पुलिस, प्रशासन, दमकल विभाग और एसडीआरएफ की टीमें लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहीं और स्थिति पर नजर बनाए रखी। समाचार लिखे जाने तक किसी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब छह बजे हिमालय कोल्ड स्टोरेज परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआती कुछ मिनटों में आग सीमित क्षेत्र में थी, लेकिन जल्द ही उसने पूरे परिसर को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। कोल्ड स्टोरेज के भीतर मौजूद ज्वलनशील सामग्री और बंद संरचना के कारण आग तेजी से फैलती चली गई।
कुछ ही देर में लपटें इतनी ऊंची उठने लगीं कि दूर-दूर तक धुएं का घना गुबार दिखाई देने लगा। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। शुरुआती दमकल वाहन मौके पर पहुंचे, लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए अतिरिक्त संसाधन बुलाने पड़े।
शुरुआत में सीमित संख्या में पहुंचीं दमकल गाड़ियों की जगह बाद में लगातार अतिरिक्त फायर टेंडर भेजे गए। आग की भयावहता को देखते हुए करीब दो दर्जन दमकल गाड़ियां मौके पर तैनात की गईं। ऊंचाई और भीतर तक पहुंच बनाने के लिए हाइड्रोलिक फायर टेंडर भी लगाए गए।
घंटों तक लगातार पानी की बौछारें की जाती रहीं। दमकल कर्मी कई दिशाओं से आग को नियंत्रित करने का प्रयास करते रहे ताकि लपटें आसपास की इमारतों तक न फैल सकें। अभियान के दौरान अधिकारियों ने लगातार स्थिति की समीक्षा की और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए।
आग की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की दो टीमें भी घटनास्थल पर भेजी गईं। एसडीआरएफ ने दमकल विभाग और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग किया।
अधिकारियों की प्राथमिकता आग पर नियंत्रण के साथ-साथ किसी भी संभावित हादसे को रोकना और आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। पूरे अभियान के दौरान पुलिस ने क्षेत्र की घेराबंदी बनाए रखी और अनावश्यक भीड़ को घटनास्थल से दूर रखा।
आग के फैलने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने दयाल रेजिडेंसी और आसपास के कई मकानों को एहतियातन खाली करा दिया। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने घर-घर जाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। कई परिवारों को अपना घर छोड़कर बाहर निकलना पड़ा।
इलाके में गैस सिलेंडर, बिजली के उपकरण और अन्य संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। आसपास की सड़कों पर यातायात भी प्रभावित रहा और लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई।
राहत अभियान के दौरान कोल्ड स्टोरेज के अंदर की एक दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग के कारण अंदर अत्यधिक गर्मी और गैस बनने जैसी स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे यह संरचनात्मक क्षति हुई। हालांकि इस संबंध में अंतिम तकनीकी निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
दीवार गिरने से कुछ समय के लिए राहत अभियान की रणनीति बदलनी पड़ी। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए सिरे से पानी की बौछारों और कूलिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया, ताकि किसी भी कर्मी की जान जोखिम में न पड़े।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हिमालय कोल्ड स्टोरेज में अहियागंज के कई व्यापारियों का माल रखा हुआ था। आग की वजह से बड़ी मात्रा में सामान के नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी तक जारी नहीं किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि जब तक आग पूरी तरह बुझ नहीं जाती और परिसर सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक वास्तविक क्षति का आकलन संभव नहीं है। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम विस्तृत निरीक्षण कर नुकसान की रिपोर्ट तैयार करेगी।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने रिहायशी क्षेत्र के बीच व्यावसायिक कोल्ड स्टोरेज के संचालन पर सवाल उठाए। कुछ निवासियों का कहना है कि घनी आबादी के बीच इस तरह की व्यावसायिक इकाई सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
घटना के कई घंटे बाद भी आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। अधिकारियों के अनुसार, जब तक कूलिंग ऑपरेशन पूरा नहीं हो जाता और पूरा परिसर सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक फॉरेंसिक और तकनीकी जांच शुरू करना संभव नहीं है।
आग पर पूरी तरह नियंत्रण मिलने के बाद विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही आग लगने के कारण, सुरक्षा मानकों के पालन और वास्तविक नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
