लखनऊ। निवेश के नाम पर लोगों को कम समय में रकम दोगुनी करने का कथित झांसा देकर पैसे लेने और बाद में दबाव बनाने के मामले में फरार चल रहे दरोगा मोहित कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इसके बाद आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी हो चुका है।
पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहने की स्थिति में अब आरोपी के खिलाफ उद्घोषणा की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। तय अवधि में अदालत के सामने पेश नहीं होने पर आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है। मामले में पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच के दौरान पुलिसकर्मियों और अर्द्धसैनिक बल से जुड़े लोगों की कथित भूमिका भी सामने आने के बाद पुलिस अन्य आरोपियों और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
मामले की शुरुआत वृंदावन कॉलोनी निवासी प्रभाकर सिंह की शिकायत से हुई। प्रभाकर सिंह ने 11 जून को चिनहट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके भाई दिवाकर सिंह और उनके परिचित अनूप शुक्ला को एक कंपनी में निवेश करने के लिए तैयार किया गया था। उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि कंपनी में पैसा लगाने पर कम समय में रकम दोगुनी हो जाएगी। शिकायत के अनुसार, इसी भरोसे के आधार पर दोनों को निवेश के लिए बुलाया गया। आरोप है कि रकम लेकर पहुंचने के बाद उन्हें बंधक बना लिया गया और करीब पांच लाख रुपये छीन लिए गए। विरोध करने पर मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
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शिकायत के मुताबिक, गिरोह के सदस्य पहले लोगों को निवेश के जरिए कम समय में अधिक रकम मिलने का भरोसा देते थे। इसके बाद उन्हें एक निजी कंपनी में निवेश कराने के नाम पर बुलाया जाता था। आरोप है कि रकम लेने के बाद पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि गिरोह के कुछ सदस्य खुद को पुलिस की अलग-अलग शाखाओं का अधिकारी बताते थे। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर पुलिस अधिकारी होने की पहचान का इस्तेमाल लोगों को डराने और दबाव बनाने के लिए किया जाता था। मामले की जांच में कई पीड़ितों से रकम वसूलने और कुछ मामलों में लूटपाट के आरोप भी सामने आए हैं।
मामले में पुलिस ने 12 जून को कार्रवाई करते हुए हरदासखेड़ा नहर पुलिया के पास से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गोरखपुर निवासी जावेद हुसैन और आसिफ, संतकबीरनगर निवासी प्रवेश त्रिपाठी तथा राजस्थान निवासी पूरन सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के दौरान गिरोह के काम करने के तरीके और उससे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जानकारी जुटाई। इसके बाद जांच का दायरा उन लोगों तक बढ़ाया गया, जिनकी कथित भूमिका मामले में सामने आई।
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जांच आगे बढ़ने पर मामले में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल से जुड़े लोगों की कथित संलिप्तता सामने आने की बात कही गई। पुलिस के मुताबिक, जांच में एसआई मोहित कुमार, सिपाही पूरन सिंह और सीआरपीएफ दरोगा जय प्रकाश यादव समेत छह लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई थी। इनमें कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुछ अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
मामले में आरोपी दरोगा मोहित कुमार गिरफ्तारी से बचते हुए फरार चल रहा है। उसने अदालत में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। हालांकि अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। जमानत खारिज होने के बाद आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद पुलिस के पास आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का आधार है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जमानत याचिका खारिज होने और गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी आरोपी के फरार रहने पर अब उद्घोषणा की कार्रवाई की तैयारी है। अदालती प्रक्रिया के तहत आरोपी को निर्धारित अवधि में अदालत के सामने पेश होने के लिए कहा जाएगा। इसके लिए उसके घर और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर नोटिस चस्पा किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। सार्वजनिक रूप से घोषणा भी की जा सकती है कि संबंधित आरोपी फरार है और उसे अदालत के सामने पेश होना है। यदि निर्धारित अवधि में आरोपी अदालत के समक्ष पेश नहीं होता है, तो उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उद्घोषणा की प्रक्रिया के बाद भी आरोपी के फरार रहने की स्थिति में उसकी संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में मामले में कार्रवाई केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी चल और अचल संपत्ति भी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है। हालांकि कुर्की की कार्रवाई संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेश के अनुसार होगी।
मामले में जिन पुलिसकर्मियों और अन्य आरोपियों की कथित भूमिका सामने आई है, उनमें फरार लोगों की तलाश जारी है। पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। मामले की जांच में गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उसके कथित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले में दर्ज शिकायत के अनुसार, निवेश के नाम पर दिवाकर सिंह और अनूप शुक्ला को बुलाए जाने के बाद उन्हें कथित तौर पर बंधक बनाया गया और करीब पांच लाख रुपये छीन लिए गए। शिकायत में विरोध करने पर मारपीट का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों और फरार आरोपियों के खिलाफ जारी कानूनी कार्रवाई इसी जांच का हिस्सा है।
चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद फरार दरोगा मोहित कुमार की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद अब उद्घोषणा की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। यदि आरोपी निर्धारित अवधि में अदालत के सामने पेश नहीं होता है, तो उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें परिस्थितियों के अनुसार संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।