राजधानी लखनऊ के बीबीडी थाना क्षेत्र स्थित जुग्गौर गांव में पिछले कुछ दिनों से मवेशियों की लगातार हो रही मौतों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव के लोगों का दावा है कि पहले मवेशी अचानक बीमार पड़ने लगे और फिर एक-एक कर उनकी मौत होने लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास स्थित एक फैक्ट्री से कथित रूप से छोड़े गए दूषित पानी को पीने के बाद यह सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से मवेशियों की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मृत मवेशियों के पोस्टमार्टम, पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच और दोषी पाए जाने पर संबंधित पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में संचालित एक फैक्ट्री में रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है और वहां से निकलने वाले अपशिष्ट जल का समुचित निस्तारण नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि कथित रूप से यही पानी आसपास के निचले हिस्सों में जमा हो गया, जिसे पीने के बाद कई मवेशी बीमार पड़ गए और बाद में उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का दावा है कि अभी भी कई पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से भी समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
ग्रामीणों के अनुसार, इस घटना में प्रकाश यादव, जयविंद यादव और जय विजय यादव सहित कई पशुपालकों को नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों का कहना है कि पशुपालन उनकी आय का प्रमुख साधन है और मवेशियों की मौत से उनके परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं और नुकसान और बढ़ सकता है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर संबंधित विभागों की संयुक्त टीम भेजकर पूरे मामले की जांच कराई जाए। उन्होंने मृत मवेशियों के पोस्टमार्टम, पानी के नमूनों की लैब जांच, कथित प्रदूषण के स्रोत की पहचान और प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले में ग्रामीणों के आरोप और शिकायतें सामने आई हैं। मवेशियों की मौत का वास्तविक कारण प्रशासनिक और वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। समाचार लिखे जाने तक न तो प्रशासन की ओर संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आया था।