लखनऊ में सपा नेता मुकेश श्रीवास्तव के लक्जरी होटल पर छापा, घंटों चली जांच

19 Aug 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के नेता और बहराइच के पयागपुर से पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव के मटियारी क्षेत्र स्थित लक्जरी होटल मिलेनिआ रीजेंसी में बुधवार सुबह जांच एजेंसी की टीम पहुंची। उपलब्ध जानकारी के अनुसार टीम सुबह करीब 7 बजे होटल पहुंची और कई घंटे तक कार्रवाई चली।

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यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मुकेश श्रीवास्तव आय से अधिक संपत्ति और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग ने उन्हें 10 जून 2026 को लखनऊ के वेव मॉल के पास से गिरफ्तार किया था।

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होटल में हुई कार्रवाई के दौरान एजेंसी की टीम ने कई घंटे तक जांच की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस कार्रवाई के दौरान बरामद किसी विशेष दस्तावेज, नकदी, संपत्ति या अन्य सामग्री का विवरण नहीं दिया गया है।

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जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी की टीम बुधवार सुबह लगभग 7 बजे लखनऊ के मटियारी क्षेत्र स्थित होटल मिलेनिआ रीजेंसी पहुंची। इसके बाद होटल में कई घंटे तक जांच और कार्रवाई की गई।

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होटल मुकेश श्रीवास्तव से जुड़ा बताया गया है। कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से जांच एजेंसी की गतिविधि और उनके खिलाफ पहले से चल रहे मामलों से संबंधित है।

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फिलहाल उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि होटल से कार्रवाई के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली है। एजेंसी की ओर से कार्रवाई के विस्तृत नतीजों की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

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मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ जांच का एक प्रमुख आधार आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा मामला है। उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, 2012 से 2017 के बीच विधायक रहने के दौरान उनकी सभी कानूनी और ज्ञात आय के स्रोतों से कुल आय करीब 1.12 करोड़ रुपये आंकी गई।

इसी अवधि के दौरान जांच में करीब 1.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाने या संपत्ति बनाए जाने का उल्लेख है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह राशि उनकी वैध आय से करीब 59.74 प्रतिशत अधिक थी। अंतर लगभग 67 लाख रुपये बताया गया है।

सतर्कता विभाग की जांच के अनुसार, इस अतिरिक्त राशि के संबंध में उनसे स्पष्टीकरण और कानूनी स्रोतों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। उपलब्ध जानकारी में कहा गया है कि वह इस अतिरिक्त संपत्ति या खर्च के संबंध में संतोषजनक कानूनी दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसी आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सतर्कता विभाग ने मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2023 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

मामले की जांच के दौरान उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों की पड़ताल की गई। जांच में वर्ष 2012 से 2017 के बीच उनकी विधायक अवधि से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संपत्ति के विवरण पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इसी जांच से संबंधित आरोपों के आधार पर बाद में उनकी गिरफ्तारी की गई।

सतर्कता विभाग ने मुकेश श्रीवास्तव को 10 जून 2026 को लखनऊ के वेव मॉल के पास से गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी आय से अधिक संपत्ति के मामले और एनएचएम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की पृष्ठभूमि में हुई थी। इसके बाद मामला अदालत में भी पहुंचा और उनकी जमानत याचिकाओं पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई 2026 में अदालत ने उनके खिलाफ नियमित और अग्रिम जमानत की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इन याचिकाओं के खारिज होने के पीछे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया था।

मुकेश श्रीवास्तव पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानी एनआरएचएम/एनएचएम से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में भी गंभीर आरोप हैं। उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी खरीद और कामकाज में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। इनमें खासतौर पर बलरामपुर, श्रावस्ती और गोंडा जैसे जिलों का उल्लेख किया गया है।

आरोपों के अनुसार, कुछ अस्पतालों में काम पूरा किए बिना या केवल आंशिक काम दिखाकर सरकारी धन का पूरा भुगतान प्राप्त किया गया। इसी तरह दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य विभाग के वाहनों के रखरखाव से संबंधित खरीद में कथित तौर पर फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान कराया गया। इन मामलों में करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन के आरोप भी जांच का हिस्सा रहे हैं।

जांच से जुड़े उपलब्ध विवरण में यह आरोप भी शामिल है कि सरकारी टेंडर हासिल करने और फर्जी बिलों को मंजूरी दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 10 से 25 प्रतिशत तक कमीशन या रिश्वत दिए जाने की व्यवस्था थी।

यह आरोप तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच से संबंधित बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को ही निर्णायक माना जाएगा। उपलब्ध सामग्री में लगाए गए आरोपों को जांच के दायरे में बताया गया है।

मुकेश श्रीवास्तव पर सरकारी ठेकों में नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। जांच विवरण के अनुसार, उनके भाई की निर्माण कंपनी आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन और अन्य संबंधित लोगों को सरकारी कार्य दिलाने के लिए कथित तौर पर प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया।

जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही थीं कि सरकारी ठेके किस प्रक्रिया के तहत दिए गए और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। यह मामला केवल एक व्यक्ति से जुड़े वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं बताया गया, बल्कि सरकारी खरीद और ठेका प्रक्रिया से जुड़े व्यापक आरोपों की जांच का हिस्सा रहा है।

मुकेश श्रीवास्तव से जुड़े मामले में सरकारी खरीद पोर्टल जेम के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोप है कि मेरठ के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सरकारी खरीद पोर्टल की आईडी और पासवर्ड हासिल किए गए और इसके बाद लखनऊ स्थित निजी कार्यालय से बैठकर कथित रूप से करोड़ों रुपये के टेंडर और सरकारी ऑर्डर संचालित किए गए।

यह आरोप जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल बताया गया है। इसके जरिए सरकारी खरीद प्रक्रिया पर प्रभाव डालने और टेंडर प्रबंधन में हस्तक्षेप के आरोपों की जांच की गई।

मुकेश श्रीवास्तव से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जांच केवल उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग तक सीमित नहीं बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो, उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग और आर्थिक अपराध शाखा भी अलग-अलग स्तर पर मामले की जांच कर रहे हैं।

जांच का दायरा आय से अधिक संपत्ति, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितता, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद, वाहन रखरखाव, टेंडर प्रक्रिया और सरकारी खरीद पोर्टल के कथित इस्तेमाल से जुड़े बिंदुओं तक बताया गया है।

मुकेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की पयागपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं। 2012 से 2017 के बीच उनके विधायक रहने की अवधि का उल्लेख आय से अधिक संपत्ति की जांच में किया गया है।

उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ी और जून 2026 में उनकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा। जुलाई 2026 में उनकी नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने की जानकारी उपलब्ध है। अब लखनऊ के मटियारी स्थित उनके होटल मिलेनिआ रीजेंसी में हुई एजेंसी की कई घंटे की कार्रवाई इसी व्यापक जांच के संदर्भ में सामने आई है।

बुधवार सुबह करीब 7 बजे जांच एजेंसी की टीम होटल पहुंची और कई घंटे तक कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी में फिलहाल कार्रवाई के दौरान किसी विशेष बरामदगी, नए मामले या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।

आगे की जांच में एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होटल पर हुई कार्रवाई और मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ पहले से चल रही जांच के बीच संबंध की ही जानकारी सामने आई है।