पिछले साल 15वें स्थान पर था लखनऊ, अब स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देश में नंबर वन

07 Sep 2026

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने वायु गुणवत्ता सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ को देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला शहर चुना गया है। इस उपलब्धि के लिए सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में लखनऊ नगर निगम को सम्मानित किया गया। महापौर सुषमा खर्कवाल ने समारोह में पहुंचकर पुरस्कार ग्रहण किया।

लखनऊ की इस उपलब्धि का संबंध शहर में वायु प्रदूषण कम करने और उससे जुड़े विभिन्न उपायों के क्रियान्वयन से है। सर्वेक्षण में केवल वायु गुणवत्ता के आंकड़ों को ही आधार नहीं बनाया जाता, बल्कि स्थानीय निकायों और प्रशासन की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए कार्यों तथा उनके क्रियान्वयन का भी मूल्यांकन किया जाता है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत होने वाले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों के प्रदर्शन को विभिन्न मानकों पर परखा जाता है। इनमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी और औद्योगिक प्रदूषण जैसे विषय शामिल हैं। लखनऊ में इन क्षेत्रों में किए गए प्रयासों का मूल्यांकन राष्ट्रीय स्तर पर किया गया। इसके बाद शहर को वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहर के रूप में सम्मान मिला। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में लखनऊ नगर निगम की ओर से महापौर सुषमा खर्कवाल ने पुरस्कार ग्रहण किया। इस तरह शहर के प्रदूषण नियंत्रण और वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े स्थानीय स्तर के प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली।

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लखनऊ के मौजूदा प्रदर्शन की खास बात इसकी पिछली रैंकिंग में आया बदलाव है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ 15वें स्थान पर रहा था। उस समय शहर को 200 में से 179 अंक मिले थे। अब इसी श्रेणी में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया है। यानी पिछले सर्वेक्षण की तुलना में शहर की रैंकिंग में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब लखनऊ जैसे बड़े शहरों में बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और कचरा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।

शहर में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों के तहत कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर करने के प्रयास किए गए हैं। प्रदेश सरकार की ओर से अप्रैल 2026 में लखनऊ नगर निगम के लिए 250 इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को भी हरी झंडी दिखाई गई थी। इन वाहनों का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को आगे बढ़ाना है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मूल्यांकन किए जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में कचरा संग्रहण और प्रबंधन व्यवस्था में किए गए सुधार शहर के समग्र प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं।

लखनऊ में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सड़क की धूल पर नियंत्रण से जुड़े उपायों पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा खुले में कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए हैं। बड़े शहरों में सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले कण वायु गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में इनसे संबंधित नियंत्रण उपायों और उनके क्रियान्वयन को भी मूल्यांकन के दायरे में रखा जाता है। वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना भी प्रदूषण नियंत्रण की इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

लखनऊ की उपलब्धि में वार्ड स्तर पर किए गए काम का भी उल्लेख सामने आया है। शहर के जोन-4 के वार्ड नंबर-70 ने भी स्वच्छ वायु के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, वार्ड नंबर-70 ने अपनी श्रेणी में अच्छा प्रदर्शन किया। वार्ड स्तर पर किए गए इस तरह के प्रयासों को शहर के व्यापक स्वच्छ वायु अभियान से जोड़कर देखा गया है। शहर में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े काम केवल केंद्रीय या नगर स्तर की योजनाओं तक सीमित नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई और प्रदूषण रोकने से जुड़े उपाय भी समग्र प्रदर्शन का हिस्सा हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत होने वाला स्वच्छ वायु सर्वेक्षण शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का आकलन करता है। इसमें हवा के स्तर से जुड़े आंकड़ों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों और उनके क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जाता है। सर्वेक्षण के प्रमुख क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण शामिल हैं। इस प्रक्रिया में शहरों की ओर से अपनाए गए उपायों और उनके जमीनी क्रियान्वयन को महत्व दिया जाता है। इसलिए किसी शहर की रैंकिंग केवल एक दिन या एक समय की हवा की स्थिति पर आधारित नहीं होती, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन भी इसमें शामिल रहता है।

लखनऊ नगर निगम की कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अप्रैल 2026 में 250 इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को हरी झंडी दिखाई गई थी। इन वाहनों को पर्यावरण अनुकूल कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ा गया। कचरा संग्रहण और उसके प्रबंधन को बेहतर करना शहर में स्वच्छता के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों का भी हिस्सा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को एक महत्वपूर्ण मानक के रूप में शामिल किया गया है। ऐसे में इस क्षेत्र में किए गए सुधारों का शहर के प्रदर्शन में महत्व रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के बावजूद शहर में वायु प्रदूषण से जुड़े मुद्दे बने हुए हैं। बढ़ती वाहनों की संख्या, यातायात जाम, सड़क की धूल और तेजी से बढ़ती निर्माण गतिविधियां शहर की वायु गुणवत्ता से जुड़े प्रमुख विषय हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इन क्षेत्रों में लगातार काम करने की जरूरत बनी हुई है। कचरा जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। शहर की मौजूदा रैंकिंग पिछले सर्वेक्षण की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। पिछले साल 15वें स्थान पर रहने के बाद इस बार पहला स्थान हासिल करना लखनऊ की रैंकिंग में दर्ज महत्वपूर्ण बदलाव है।