लखनऊ। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पावन अस्थि कलश और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर केवल मौखिक आश्वासन दिया है, जबकि वे लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट लिखित निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सोमवार को आरपीआई नेताओं ने अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद अंबेडकर महासभा तक पैदल मार्च निकालने का प्रयास किया। पार्टी के अनुसार प्रशासन ने उन्हें अंबेडकर प्रतिमा से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद अधिकारियों और पार्टी प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई।
आरपीआई नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने और उचित कार्रवाई का मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि केवल मौखिक भरोसे के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जा सकता और सरकार को अपना रुख आधिकारिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।
पार्टी नेताओं ने बाबा साहब के पावन अस्थि कलश को लेकर चल रही चर्चाओं का उल्लेख करते हुए मांग की कि मुख्यमंत्री स्वयं सार्वजनिक रूप से घोषणा करें कि अस्थि कलश को उसके वर्तमान स्थान से नहीं हटाया जाएगा। नेताओं का कहना है कि इससे समाज में फैली आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अस्थि कलश को हटाने जैसा कोई कदम उठाया गया तो पार्टी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में भी आंदोलन करेगी।
आरपीआई ने आंदोलन के अगले चरण की भी घोषणा की है। पार्टी के अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके अलावा 9 अगस्त को लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया गया है।
आरपीआई का कहना है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पावन अस्थि कलश और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर के संबंध में उठे मुद्दों को लेकर पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है। इसी क्रम में अंबेडकर महासभा तक पैदल मार्च प्रस्तावित था। हालांकि प्रशासन ने उन्हें अंबेडकर प्रतिमा से आगे नहीं जाने दिया और वार्ता के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।