राजधानी लखनऊ में रविवार को सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण मोर्चा ने विरोध प्रदर्शन किया। मोर्चा की ओर से 23 अगस्त 2026 को सवर्ण समाज से आने वाले सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘शव यात्रा’ निकाली गई। संगठन का आरोप है कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर कई जनप्रतिनिधियों ने अपेक्षित रूप से आवाज नहीं उठाई।
मोर्चा के अनुसार, प्रतीकात्मक शव यात्रा 1090 चौराहे से शुरू होकर भैसाकुंड श्मशान घाट तक पहुंची। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जनप्रतिनिधियों की कथित निष्क्रियता के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इस दौरान केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार को भी संगठन की ओर से निशाने पर लिया गया।
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी, आरक्षण व्यवस्था और एससी/एसटी अधिनियम से जुड़े मुद्दे रहे। मोर्चा ने इन विषयों को लेकर सवर्ण समाज में असंतोष का दावा किया।
यह खबर भी पढ़े - पांच दिन कैमरे के सामने ‘कैद’, फिर ₹1.30 करोड़ ट्रांसफर; लखनऊ में डिजिटल अरेस्ट
सवर्ण मोर्चा ने अपनी कार्रवाई को प्रतीकात्मक बताया। संगठन के मुताबिक, जिन नेताओं से सवर्ण समाज अपने मुद्दों को लेकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आवाज उठाने की उम्मीद करता है, उनकी कथित चुप्पी के विरोध में यह तरीका अपनाया गया।
मोर्चा का आरोप है कि सवर्ण समाज से आने वाले कई सांसद, विधायक और मंत्री समाज से जुड़े सवालों पर सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं। संगठन ने इसी कथित निष्क्रियता को विरोध का मुख्य आधार बनाया और राजनेताओं की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली।
इस प्रदर्शन का उद्देश्य किसी व्यक्ति के खिलाफ वास्तविक अंतिम संस्कार जैसी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संगठन के मुताबिक राजनीतिक निष्क्रियता के प्रतीक के तौर पर विरोध दर्ज कराना था।
यह खबर भी पढ़े - यूपी में 332 नायब तहसीलदार बने तहसीलदार, कई जिलों में नई तैनाती
सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी, आरक्षण व्यवस्था और एससी/एसटी अधिनियम जैसे मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज में लंबे समय से असंतोष है।
उनका आरोप है कि इन विषयों पर सवर्ण समाज से आने वाले सांसदों, विधायकों और मंत्रियों ने अपेक्षित तरीके से आवाज नहीं उठाई। मोर्चा का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर समाज की चिंताओं को राजनीतिक स्तर पर पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान इन्हीं विषयों को लेकर संगठन ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई और जनप्रतिनिधियों से समाज के सवालों पर सक्रिय भूमिका निभाने की मांग रखी।
सवर्ण मोर्चा के मुताबिक, उसका विरोध केवल किसी एक राजनीतिक दल के नेताओं तक सीमित नहीं है। संगठन का कहना है कि जो भी जनप्रतिनिधि सवर्ण समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर चुप हैं, उनके खिलाफ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
मोर्चा ने कहा कि उसके प्रदर्शन का आधार नेताओं का दल नहीं, बल्कि मुद्दों पर उनकी कथित चुप्पी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रतीकात्मक शव यात्रा के जरिए अपनी नाराजगी दर्ज कराई गई।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान नेताओं को समाज की याद आती है, लेकिन चुनाव के बाद सत्ता और पद मिलने पर कई जनप्रतिनिधि समाज की समस्याओं पर चुप हो जाते हैं।
मोर्चा के अनुसार, इसी कथित दोहरे रवैये के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सवर्ण समाज को केवल चुनावी गणित का हिस्सा मानने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों से राजनीतिक रूप से जागरूक रहने और अपने मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाने की अपील भी की गई।
प्रदर्शन के दौरान सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों ने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। संगठन की ओर से कहा गया कि सरकार को सवर्ण समाज से जुड़ी मांगों और चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि उसकी मांगों और चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले समय में विरोध को और व्यापक स्तर तक ले जाया जाएगा।
संगठन ने दावा किया कि सवर्ण समाज को राजनीतिक रूप से लामबंद कर सरकार की नीतियों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आगे होने वाले किसी विशेष कार्यक्रम की तारीख या विस्तृत कार्यक्रम का उल्लेख नहीं किया गया है।
रविवार के प्रदर्शन में प्रतीकात्मक शव यात्रा का मार्ग भी विरोध के तरीके का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। यात्रा 1090 चौराहे से शुरू हुई और भैसाकुंड श्मशान घाट तक पहुंची।
मोर्चा के मुताबिक, भैसाकुंड तक यात्रा ले जाने के पीछे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि समाज की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरने वाले जनप्रतिनिधियों को संगठन राजनीतिक रूप से निष्क्रिय मानता है।
यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों और विरोध से जुड़े मुद्दों को उठाया। संगठन के पदाधिकारियों ने इसे सवर्ण समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के अभियान का हिस्सा बताया।
सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। कार्यक्रम में बसंत सिंह बघेल, दुर्गेश पांडे, राकेश सिंह रघुवंशी, अशोक सिंह, अरविंद पाठक, ईशांत सेंगर, ठाकुर हर्ष सिंह, भानु पांडे, अवधेश शुक्ला, सौर्या सिंह राजपूत, अनिशा द्विवेदी, श्रीमती माधुरी सिंह और अभिषेक अग्निहोत्री समेत कई कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बताई गई। प्रदर्शन में संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अपने मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध दर्ज कराया।
सवर्ण मोर्चा का कहना है कि प्रदर्शन केवल तत्काल विरोध तक सीमित नहीं है। संगठन इसे समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के अभियान के रूप में देखता है। मोर्चा के अनुसार, समाज से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाना और राजनीतिक जवाबदेही की मांग करना आंदोलन का हिस्सा है।
इसी क्रम में प्रतीकात्मक शव यात्रा को विरोध के एक तरीके के तौर पर इस्तेमाल किया गया। संगठन ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भी मुद्दों पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा सकता है।