लखनऊ विश्वविद्यालय के ओल्ड कैंपस में सोमवार को करीब 100 सुरक्षा कर्मियों को नौकरी से हटाए जाने के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुआ। सुरक्षा कर्मियों के समर्थन में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान परिसर में नारेबाजी हुई और कुलपति के खिलाफ भी नारे लगाए गए।
प्रदर्शन में शामिल सुरक्षा कर्मियों और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि इनमें कई कर्मचारी वर्ष 2018 से लखनऊ विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे कर्मियों को हटाने के फैसले का विरोध किया और नौकरी के साथ पुरानी फीस तथा सेवा शर्तें बहाल करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, लखनऊ विश्वविद्यालय में लंबे समय से काम कर रहे करीब 100 सुरक्षा कर्मियों की सेवाएं समाप्त किए जाने का मामला सामने आया है। इसी के विरोध में सुरक्षा कर्मी ओल्ड कैंपस में धरने पर बैठे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई सुरक्षा कर्मी वर्ष 2018 से विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनकी नौकरी समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
सुरक्षा कर्मियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उनकी स्थिति पर स्पष्ट निर्णय लेने और वर्षों से चली आ रही सेवा व्यवस्था को लेकर उनकी मांगों पर विचार करने की मांग की। एनएसयूआई और प्रदर्शन कर रहे सुरक्षा कर्मियों ने केवल नौकरी बचाने की मांग ही नहीं उठाई, बल्कि पुरानी फीस और सेवा शर्तों को बहाल करने की मांग भी रखी।
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प्रदर्शनकारियों ने भुगतान की दो किस्तों वाली पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि सुरक्षा कर्मियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित सुरक्षा कंपनी को इस मामले का समाधान करना चाहिए। मांगों में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की नौकरी को लेकर स्थिति स्पष्ट करना और उनकी सेवा से जुड़ी पुरानी व्यवस्था बहाल करना प्रमुख रूप से शामिल रहा।
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ हिंद सिक्योरिटी कंपनी के खिलाफ भी नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा कर्मियों के साथ अन्याय किए जाने का आरोप लगाया और उनकी समस्याओं पर कार्रवाई की मांग की। एनएसयूआई की ओर से हिंद सिक्योरिटी कंपनी के मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी की गई। संगठन ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में विश्वविद्यालय प्रशासन या संबंधित सुरक्षा कंपनी की ओर से प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर कोई अलग पक्ष या आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं से बातचीत की और उनकी मांगों को सुना।
मांगों को लेकर प्रॉक्टर और छात्र नेताओं के बीच बातचीत हुई। बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर बहस भी हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे और कार्रवाई की मांग करते रहे। मामले के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में स्थानीय पुलिस भी मौजूद रही। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन को नियंत्रित रखा गया।
ओल्ड कैंपस में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुलपति के खिलाफ भी नारे लगाए। प्रदर्शनकारी सुरक्षा कर्मियों की नौकरी और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन से निर्णय की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष और छात्र नेता आर्यन मिश्रा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि संगठन छात्रों और कर्मचारियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में वर्षों से सेवाएं दे रहे सुरक्षा कर्मियों को हटाया जाना गंभीर मामला है। एनएसयूआई ने कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान सामने आई प्रमुख मांगों में सुरक्षा कर्मियों की नौकरी समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार, पुरानी फीस और सेवा शर्तों को बहाल करना तथा भुगतान की दो किस्तों वाली पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करना शामिल है। इसके अलावा एनएसयूआई ने हिंद सिक्योरिटी कंपनी के मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी उठाई है।