लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय स्थित बीएड विभाग में गुरुवार को बिजली गुल होने के बाद लिफ्ट बीच रास्ते में बंद हो गई। लिफ्ट में सवार शोध छात्रा अनुक्ता सिंह उसके अंदर फंस गईं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छात्रा को करीब 30 से 45 मिनट तक लिफ्ट से बाहर नहीं निकाला जा सका। बाद में वहां मौजूद छात्रों ने प्रयास कर लिफ्ट का दरवाजा खोला और छात्रा को बाहर निकाला।
घटना के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में लिफ्ट की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। छात्रों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद जिम्मेदार तकनीकी कर्मचारी या संबंधित स्टाफ समय पर मौके पर नहीं पहुंचा।
जानकारी के मुताबिक, शोध छात्रा अनुक्ता सिंह बीएड विभाग की लिफ्ट से जा रही थीं। इसी दौरान अचानक बिजली चली गई। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और उसके दरवाजे बंद रहे। लिफ्ट के रुकने के बाद छात्रा बाहर नहीं निकल सकीं। कुछ समय बाद आसपास मौजूद छात्रों को उनके अंदर फंसे होने की जानकारी हुई। इसके बाद विभाग और विश्वविद्यालय के जिम्मेदार लोगों तक सूचना पहुंचाई गई। घटना के दौरान छात्रा को लिफ्ट के अंदर ही सहायता का इंतजार करना पड़ा।
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शोध छात्रा को लिफ्ट से बाहर निकालने में करीब आधे घंटे से अधिक समय लगा। उपलब्ध जानकारी में इस अवधि को करीब 30 से 45 मिनट बताया गया है। इस दौरान लिफ्ट के अंदर फंसी छात्रा को बाहर निकालने के लिए प्रयास किए जाते रहे। बताया गया कि विश्वविद्यालय का तकनीकी कर्मचारी अथवा वर्क्स विभाग से संबंधित जिम्मेदार स्टाफ तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद वहां मौजूद छात्रों ने खुद लिफ्ट का दरवाजा खोलने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खोला गया और छात्रा को बाहर निकाला गया।
घटना के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। छात्रों का कहना है कि बड़े शिक्षण संस्थान में लिफ्ट जैसी सुविधा के संचालन के साथ आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था भी उपलब्ध होनी चाहिए। छात्रों ने यह सवाल भी उठाया कि बिजली जाने या लिफ्ट के तकनीकी कारणों से बंद होने की स्थिति में अंदर फंसे व्यक्ति को तत्काल सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाती है। छात्रों के अनुसार, ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की त्वरित उपलब्धता जरूरी है। घटना में छात्रों द्वारा स्वयं लिफ्ट का दरवाजा खोलने के प्रयास किए जाने के बाद इस व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आए हैं।
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घटना के बाद यह सवाल भी उठाया गया कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में लिफ्ट की आपातकालीन व्यवस्था किस तरह काम करती है। सवाल यह है कि क्या लिफ्ट में बिजली कटने की स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद थी और क्या आपातकालीन अलार्म जैसी सुविधाएं काम कर रही थीं। उपलब्ध जानकारी में इस संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसी के साथ लिफ्ट के नियमित रखरखाव और सुरक्षा परीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। घटना के बाद यह जानकारी सामने नहीं आई है कि बीएड विभाग की संबंधित लिफ्ट का आखिरी सुरक्षा परीक्षण कब हुआ था।
घटना में छात्रों के अनुसार मुख्य चिंता केवल लिफ्ट के बीच में रुकने की नहीं, बल्कि फंसे व्यक्ति को समय पर निकालने की व्यवस्था को लेकर भी है। छात्रों का कहना है कि किसी भी तकनीकी खराबी या बिजली कटौती की स्थिति में सहायता के लिए जिम्मेदार कर्मचारी को तुरंत मौके पर पहुंचना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में छात्रों को खुद बचाव का प्रयास करना पड़ा। हालांकि, इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किसी जांच, जिम्मेदारी तय किए जाने या तत्काल उठाए गए कदम की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शोध छात्रा को किसी गंभीर शारीरिक नुकसान की सूचना नहीं है और उन्हें लिफ्ट से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, करीब 30 से 45 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहने की घटना के बाद परिसर में छात्रों की सुरक्षा से जुड़े सवाल सामने आए हैं। खास तौर पर बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में लिफ्ट के संचालन और आपातकालीन सहायता को लेकर छात्रों ने व्यवस्था पर प्रश्न उठाए हैं।
घटना ने लिफ्ट के नियमित रखरखाव से जुड़े कई सवाल सामने रखे हैं। इनमें यह प्रमुख है कि संबंधित लिफ्ट की आखिरी तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण कब किया गया था। इसके अलावा यह भी सवाल है कि बिजली कटने के बाद लिफ्ट क्यों बीच रास्ते में रुक गई और ऐसी स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्या निर्धारित प्रक्रिया है। उपलब्ध जानकारी में इन सवालों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दर्ज नहीं है।