श्रीराम मंदिर के लिए जीवन समर्पित किया गोरक्षपीठ के पूज्य संतों ने: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

30 Sep 2026

गोरखपुर, 30 सितंबर। गोरखनाथ मंदिर में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दोनों संतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक कार्यों को याद किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए संतों और कई सामाजिक एवं शैक्षिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से जुड़े आंदोलन में गोरक्षपीठ की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने संत समाज को एकजुट करने के साथ श्रीराम मंदिर, समाज और राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ जी उपस्थित रहे थे। इसके बाद श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के नेतृत्व की जिम्मेदारी महंत अवेद्यनाथ जी ने संभाली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों संतों के जीवन में अपने समय, समाज और राष्ट्र की परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने की भावना दिखाई देती है। उन्होंने इसे महापुरुषों के जीवन का महत्वपूर्ण गुण बताया। गोरक्षपीठ के दोनों पूर्व पीठाधीश्वरों की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम 24 से 30 सितंबर तक चलने वाले साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का हिस्सा था। कार्यक्रम के दौरान दोनों संतों के जीवन और उनके विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को याद किया गया।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र स्थिरता है। उनके अनुसार स्थिरता का भाव व्यक्ति को आगे बढ़ने में सहायता करता है। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के जीवन चरित्र का अध्ययन करने पर इस भाव की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री ने दोनों संतों के जीवन को गुरु परंपरा से जुड़े आदर्शों और संकल्पों के संदर्भ में प्रस्तुत किया। योगी ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ के जीवन संकल्प महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों और मूल्यों का विस्तार थे।

मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और शिवभक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का गुणगान किया जाता है, उसके अनुरूप बनने का प्रयास भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवभक्तों को सम और विषम परिस्थितियों में समान और निश्छल रहने का प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव द्वारा विष धारण करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की विसंगतियों को अपने भीतर समाहित कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना ही शिवत्व है। उन्होंने इस संदर्भ में समाज के बीच मौजूद विसंगतियों के समाधान और लोक कल्याण की भावना पर जोर दिया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ हिंदू समाज की शक्ति को मजबूत करने के पक्षधर थे, जबकि महंत अवेद्यनाथ ने समाज को एकजुट करने के लिए लगातार कार्य किया। उन्होंने महंत अवेद्यनाथ द्वारा शुरू किए गए सहभोज अभियान का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य सामाजिक स्तर पर बिखरी ताकत को एकसूत्र में जोड़ना था। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भी महंतद्वय के सामाजिक कार्यों, धार्मिक गतिविधियों और समाज में उनकी भूमिका को याद किया।

मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के शैक्षिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होनी चाहिए, यह महंत दिग्विजयनाथ का विचार था। महंत अवेद्यनाथ ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उसके विस्तार और स्वावलंबन से जोड़ने पर भी काम किया। योगी ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ने के लिए विभिन्न संस्थाओं की स्थापना की। शिक्षा के साथ खेल को प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था और छात्रों के रहने के लिए प्रताप आश्रम समेत अन्य छात्रावासों की व्यवस्था का भी उन्होंने उल्लेख किया।

कार्यक्रम में मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर, रोहतक के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक महंत बालकनाथ ने दोनों संतों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने गोरक्षपीठ का नेतृत्व करते हुए सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया। उन्होंने गोरक्षपीठ को राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध कराने वाली पीठ के रूप में बताया। श्रीरामजानकी मंदिर वाराणसी से आए जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य ने महंत अवेद्यनाथ को दूरदर्शी संत बताया और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े उनके योगदान का उल्लेख किया। नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य ने गोरक्षा, सनातन धर्म और राष्ट्रीय संस्कृति के संरक्षण में गोरक्षपीठ की भूमिका का उल्लेख किया। नीमच, मध्य प्रदेश से आए महंत योगी लालनाथ ने महंत अवेद्यनाथ द्वारा रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ के नेतृत्व का जिक्र किया। हनुमानगढ़ी, अयोध्या से आए महंत राजूदास ने भी महंत अवेद्यनाथ की स्मृतियों को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने राष्ट्रीयता और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के योगदान का उल्लेख किया। गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों संतों का जीवन राष्ट्रधर्म, शैक्षिक जागरण और लोक कल्याण के लिए समर्पित रहा। कार्यक्रम में कुशीनगर के सांसद विजय दूबे, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा शर्मा कौशिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह और ध्रुव त्रिपाठी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। इसके अलावा विधायक राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान और प्रदीप शुक्ल, राज्यसभा के पूर्व सदस्य जयप्रकाश निषाद, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी और महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों की ओर से भी महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को याद किया गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से सचिव डॉ. वाई सिंह और डॉ. आरपी त्रिपाठी, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज की ओर से संरक्षक एसके अग्रवाल, दवा विक्रेता समिति की ओर से अध्यक्ष योगेंद्र दूबे, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जटाशंकर की ओर से संयुक्त सचिव सरदार जगनैन सिंह नीटू, सिंधी समाज की ओर से अर्जुन बालानी और भारत सेवाश्रम संघ की ओर से स्वामी निःश्रेयसानंद ने दोनों संतों के व्यक्तित्व और कार्यों को याद किया।

कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त सचिव रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु’ का विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंच पर मौजूद अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज रमदत्तपुर की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और श्रद्धांजलि गीत प्रस्तुत किया। डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। मृत्युंजय उपाध्याय, गौरव तिवारी और आदित्य पांडेय ने गोरक्षाष्टक पाठ किया, जबकि डॉ. प्रांगेश मिश्र ने महंत अवेद्यनाथ स्त्रोतपाठ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।

श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के अलावा हरिद्वार से योगी महासभा के महामंत्री योगी चेताईनाथ जी महाराज, काशी से जगद्गुरु श्री विष्णुस्वामी सम्प्रदायाचार्य श्री संतोषाचार्य जी महाराज ‘सतुआ बाबा’, बाघम्बरी पीठाधीश्वर प्रयागराज महंत बलबीर गिरी जी महाराज, सोंगल हरियाणा से पीर शेरनाथ जी महाराज, अयोध्या से महंत धर्मदास जी महाराज और महंत बलरामदास जी महाराज शामिल हुए। तपसीधाम, बस्ती से महंत जयबक्शदास जी, दिगम्बर अखाड़ा अयोध्याधाम से महंत रामलखनदास जी तथा कालीबाड़ी, गोरखपुर के महंत रविंद्रदास जी महाराज ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।