दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक होटल-रेस्टोरेंट बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को प्रभावित कर दिया। जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वहां मौजूद फ्लरिश स्टे होटल मुख्य रूप से मैक्स अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों और विदेशों से आए नागरिकों के ठहरने के लिए जाना जाता था। आग लगने के बाद हालात ऐसे बन गए कि कई लोगों को जान बचाने के लिए दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल से नीचे कूदना पड़ा।
यह हादसा हौज रानी गांव की एक संकरी गली में स्थित उस इमारत में हुआ, जहां ग्राउंड फ्लोर पर लेमन ग्रीन नाम का रेस्टोरेंट और ऊपर फ्लरिश स्टे होटल संचालित किया जा रहा था। आग तेजी से फैलने के कारण होटल में ठहरे लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।
क्यों चर्चा में है यह होटल?: फ्लरिश स्टे होटल केवल एक सामान्य होटल नहीं था। यह साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के नजदीक होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्थायी ठहराव का प्रमुख केंद्र माना जाता था। जानकारी के अनुसार, होटल में कुल 24 कमरे थे और यहां मुख्य रूप से वे लोग ठहरते थे जो मैक्स अस्पताल में इलाज के लिए दिल्ली आते थे। इनमें भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा बांग्लादेश, अफ्रीकी देशों और पड़ोसी देशों से आने वाले मरीज एवं उनके परिजन भी शामिल रहते थे। होटल में स्टैंडर्ड रूम, प्रीमियम ट्विन रूम और किचन सुविधा वाले प्रीमियम ट्विन रूम उपलब्ध थे। यही वजह थी कि इलाज के दौरान कई विदेशी नागरिक भी यहां लंबे समय तक रुकते थे।
संकरी गली और 'मैच बॉक्स' जैसी इमारतें बनीं चुनौती: जिस इलाके में यह इमारत स्थित है, वहां एक के बाद एक कई बहुमंजिला इमारतें बेहद करीब बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी इमारतों को अक्सर 'मैच बॉक्स बिल्डिंग' या 'कंक्रीट जंगल' कहा जाता है। इन इमारतों की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि आवाजाही के लिए आमतौर पर केवल एक मुख्य रास्ता होता है। यदि आग उसी मार्ग के आसपास फैल जाए तो अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आग तेजी से फैली और धुएं ने इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। इससे होटल में मौजूद लोगों के सामने बाहर निकलने के विकल्प सीमित हो गए।
जान बचाने के लिए तोड़े खिड़कियों के शीशे: आग और धुएं के बीच फंसे कई लोगों ने बचाव के लिए कमरों की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। इसके बाद लोगों ने दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल से नीचे कूदना शुरू किया। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में मदद की। आसपास की दुकानों से गद्दे निकालकर सड़क पर बिछाए गए ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों को कम चोट पहुंचे। हालांकि कई लोगों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने घायल व्यक्तियों को बाहर निकालने, उन्हें प्राथमिक सहायता देने और अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया। बाद में फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बचाव अभियान को अपने हाथ में लिया।
अस्पतालों में भर्ती कराए गए कई घायल: हादसे के बाद बड़ी संख्या में घायलों को नजदीकी मैक्स अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार कुल 39 मरीज अस्पताल पहुंचे थे। इनमें कई लोगों को धुएं के कारण फेफड़ों में गंभीर चोटें आईं। वहीं, ऊंचाई से कूदने के कारण कई लोगों के हाथ-पैर और अन्य हड्डियां टूट गईं। अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों को गंभीर बर्न इंजरी भी हुई है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई गई और उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया। कुछ मरीजों को आगे के उपचार के लिए एम्स के बर्न यूनिट में भी भेजा गया।
धुआं बना सबसे बड़ा खतरा: विशेषज्ञों के अनुसार, आग की घटनाओं में केवल लपटें ही नहीं बल्कि धुआं भी जानलेवा साबित होता है। इस हादसे में भी कई लोगों को धुएं के कारण सांस लेने में गंभीर दिक्कत हुई। अस्पताल में भर्ती कई मरीजों के फेफड़ों में धुएं की वजह से इंजरी पाई गई। वहीं, कुछ लोग आग से बचने के प्रयास में ऊंचाई से कूद गए, जिससे उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें आईं।