ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनाव परिणामों को “जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश” करार देते हुए पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनका कहना था कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस वास्तव में हारी नहीं है, बल्कि मतों की “लूट” हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव और मतगणना प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश को प्रभावित किया गया और मतगणना की गति जानबूझकर धीमी रखी गई। साथ ही, उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी लड़ाई भाजपा से अधिक आयोग से थी, जो कथित रूप से एक पक्ष के हित में काम कर रहा था।
गौरतलब है कि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। यह परिणाम राज्य में करीब 15 वर्षों से चल रहे टीएमसी शासन के अंत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन परिणामों के बावजूद ममता बनर्जी ने कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेंगी और सभी संवैधानिक विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
राजनीतिक रणनीति में बदलाव का संकेत देते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है।
इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनकारी रुख अपनाने का संकेत देते हुए कहा कि अब वह सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेंगी। चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा भी की गई है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और हालात का जायजा लेने की बात कही है।