गोवर्धन के पास जमीन के नीचे क्या मिला? 5000 साल पुराने प्रमाणों से खुली नई परत

05 Sep 2026

काशी और अयोध्या की तर्ज पर मथुरा-वृंदावन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है। इसी बीच गोवर्धन के पास बहाज में हुई पुरातात्विक खोदाई से प्राचीन संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेडियोमेट्रिक डेटिंग से यहां परतें बनाने वाले जमाव की उम्र करीब 5000 साल पुरानी होने के संकेत मिले हैं। वहीं, एक ट्रेंच में लगातार 6.5 मीटर तक चित्रित धूसर मृदभांड यानी पीजीडब्ल्यू मिला है।

बहाज में हुई इस खोदाई की अंतिम विस्तृत रिपोर्ट छह हिस्सों में तैयार की गई है। कुल 2550 पन्नों की यह रिपोर्ट कुछ माह पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआइ के मुख्यालय को सौंपी जा चुकी है। अब बहाज और गोवर्धन क्षेत्र से जुड़े पुरातात्विक प्रमाणों के विस्तृत अध्ययन को सामने लाने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।

मथुरा-वृंदावन को मेगा टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करने की परियोजना पर केंद्र के पर्यटन मंत्रालय और राज्य सरकार की ओर से पिछले कई वर्षों से काम चल रहा है। इस योजना में गोवर्धन क्षेत्र में अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। मथुरा और वृंदावन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इनके साथ जुड़े प्राचीन स्थलों को पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया में क्षेत्र की सांस्कृतिक और विरासत पहचान को बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

 

इसी क्रम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एएसआइ के पास पुरातात्विक सर्वेक्षण, वैज्ञानिक खोदाई, दस्तावेजीकरण, संरक्षण, पुरावशेषों की पहचान और वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित विशेषज्ञता है। मथुरा से लेकर गोवर्धन तक पिछले कई दशकों में हुई गतिविधियों के माध्यम से प्राचीन संस्कृति से जुड़े प्रमाण जुटाए गए हैं। गोवर्धन के पास डींग जिले के बहाज में हुई खोदाई इस पूरे पुरातात्विक अध्ययन का अहम हिस्सा है। यहां मिले प्रमाणों की वैज्ञानिक जांच के दौरान रेडियोमेट्रिक डेटिंग की गई। इसके आधार पर परतें बनाने वाले जमाव की उम्र लगभग 5000 साल पुरानी होने के संकेत मिले हैं।

खोदाई के दौरान एक ट्रेंच में चित्रित धूसर मृदभांड यानी पीजीडब्ल्यू लगातार 6.5 मीटर तक मिला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीजीडब्ल्यू को कौरव-पांडव काल से जोड़ा जाता है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी में पीजीडब्ल्यू की पहचान और उसकी लगातार 6.5 मीटर तक मौजूदगी का उल्लेख है। इसी आधार पर क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक परतों का अध्ययन किया जा रहा है।

बहाज की खोदाई से संबंधित अंतिम विस्तृत रिपोर्ट छह हिस्सों में तैयार की गई है। यह रिपोर्ट कुल 2550 पन्नों की है और इसे कुछ माह पहले एएसआइ मुख्यालय को सौंप दिया गया है। रिपोर्ट में खोदाई के दौरान प्राप्त सामग्री और उससे जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र से प्राप्त पुरातात्विक सामग्री, उसकी स्थिति और काल निर्धारण से संबंधित जानकारियों को दस्तावेज के रूप में सामने रखना है।

एएसआइ के स्तर पर अब इस क्षेत्र से जुड़े अध्ययन को व्यापक स्तर पर सामने लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। विशेष रूप से बहाज और गोवर्धन क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति से जुड़े मिट्टी के लाल बर्तनों और अन्य पुरावशेषों के विस्तृत अध्ययन को सार्वजनिक करने की तैयारी है। मथुरा क्षेत्र में एएसआइ की पुरानी खोदाइयों से अलग-अलग कालखंडों की सांस्कृतिक परतों के बारे में जानकारी मिली है। 1973-74 से 1976-77 के बीच मथुरा में करीब 14 स्थानों पर खोदाई की गई थी।

इन खोदाइयों से छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर छठी शताब्दी ईस्वी तक सांस्कृतिक निरंतरता के प्रमाण सामने आए थे। इससे मथुरा क्षेत्र में अलग-अलग कालखंडों में मानव गतिविधियों और संस्कृति के विकास से संबंधित पुरातात्विक जानकारी जुटाने में मदद मिली। पिछले वर्षों में गोवर्धन के आसपास भी पुरातात्विक सर्वेक्षण और खोदाई के माध्यम से नए प्रमाण सामने आए हैं। बहाज में हुई खोदाई इसी व्यापक पुरातात्विक अध्ययन का हिस्सा है।

खोदाई के दौरान केवल मृदभांड ही नहीं, बल्कि कई तरह की पुरातात्विक सामग्री मिलने की जानकारी है। इनमें सिक्के, मृद्भांड, प्रतिमाएं, वास्तु अवशेष और दैनिक जीवन से संबंधित अन्य सामग्री शामिल हैं। इन वस्तुओं को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया गया है। साथ ही इनके काल निर्धारण की प्रक्रिया भी की जा चुकी है। पुरातत्व में इस तरह की सामग्री से किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन, उनके उपयोग की वस्तुओं और तत्कालीन सांस्कृतिक परिस्थितियों से संबंधित जानकारी जुटाई जाती है।

बहाज से मिले इन प्रमाणों के अध्ययन के आधार पर क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक परतों को समझने का प्रयास किया जा रहा है। पीजीडब्ल्यू यानी चित्रित धूसर मृदभांड पुरातात्विक अध्ययन में पहचाने जाने वाले मृद्भांडों में से एक है। बहाज की खोदाई में एक ट्रेंच में इसके लगातार 6.5 मीटर तक मिलने की जानकारी सामने आई है।

उपलब्ध विवरण में इसे कौरव-पांडव कालीन माना जाने वाला पीजीडब्ल्यू बताया गया है। इस तरह की सामग्री किसी पुरातात्विक स्थल की सांस्कृतिक परतों और वहां मौजूद प्राचीन गतिविधियों के अध्ययन में उपयोगी होती है। बहाज में इसके साथ रेडियोमेट्रिक डेटिंग से करीब 5000 साल पुराने जमाव के संकेत भी मिले हैं। इन दोनों प्रकार के प्रमाणों का वैज्ञानिक अध्ययन क्षेत्र के पुरातात्विक इतिहास को समझने के लिए किया जा रहा है।

एएसआइ के स्तर पर यह माना जा रहा है कि बहाज और गोवर्धन क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति से संबंधित विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट को सामने लाने का समय आ गया है। इस अध्ययन में खोदाई से प्राप्त सामग्री और उसके वैज्ञानिक विश्लेषण को शामिल किया जाना है। इससे पहले मथुरा के बरनौली की खोदाई से संबंधित रिपोर्ट भी एएसआइ मुख्यालय को सौंपी जा चुकी है। इससे मथुरा क्षेत्र में अलग-अलग पुरातात्विक स्थलों पर किए गए अध्ययनों के दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया का पता चलता है।

बहाज की रिपोर्ट छह हिस्सों में तैयार की गई है और इसमें कुल 2550 पन्ने हैं। रिपोर्ट के मुख्यालय में जमा होने के बाद अब इससे जुड़े अध्ययन और निष्कर्षों को व्यापक स्तर पर सामने लाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। मथुरा-वृंदावन को मेगा टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करने की परियोजना में गोवर्धन क्षेत्र भी शामिल है। पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ यहां मौजूद पुरातात्विक स्थलों और विरासत से संबंधित सामग्री का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।

एएसआइ की विशेषज्ञता पुरातात्विक सर्वेक्षण, वैज्ञानिक खोदाई, दस्तावेजीकरण, संरक्षण और पुरावशेषों की पहचान से जुड़ी है। ऐसे में मथुरा से गोवर्धन तक मौजूद पुरातात्विक प्रमाणों का अध्ययन इस क्षेत्र की विरासत को दस्तावेज के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। मथुरा-वृंदावन के विकास को लेकर केंद्र सरकार की ओर से आध्यात्मिक गलियारों के विकास की बात कही गई है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाओं में सुधार के साथ क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पहचान को बनाए रखना है।