लखनऊ। नदवा कॉलेज से जुड़े मौलाना इरफान अहमद रिजवी की हत्या की साजिश के मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों में से तीन को जेल भेजे जाने के करीब 24 घंटे के भीतर जमानत मिल गई। जमानत के बाद जेल से बाहर आए तीनों आरोपियों का समर्थकों द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत किए जाने का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आया है।
हजरतगंज पुलिस के अनुसार, मौलाना की हत्या की साजिश को लेकर जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं। पुलिस का दावा है कि दो शूटर करीब एक महीने से मौलाना की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। उनके पास से चोरी की मोटरसाइकिल और अवैध पिस्तौल बरामद होने की बात कही गई है। पुलिस ने यह भी बताया कि उनके मोबाइल फोन की जांच में मौलाना की तस्वीरें मिलीं।
जांच के दौरानजुड़े लोगों के बीच फोन पर 157 बार बातचीत का रिकॉर्ड सामने आने की बात भी पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में छह लोगों की भूमिका सामने आने के बाद सभी को गिरफ्तार किया गया था।
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हजरतगंज पुलिस और मध्य जोन की निगरानी टीम ने चेकिंग के दौरान मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद जमील को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक, दोनों के पास चोरी की मोटरसाइकिल और अवैध पिस्तौल मिली।
पूछताछ के बाद पुलिस को मौलाना इरफान अहमद रिजवी की हत्या की साजिश के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया। जांच को आगे बढ़ाया गया तो दोनों के मोबाइल फोन में मौलाना की तस्वीरें मिलने की बात सामने आई।
पुलिस का कहना है कि दोनों शूटर करीब एक महीने से मौलाना की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। पुलिस जांच में यह भी देखा गया कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और उनके बीच किस तरह बातचीत हुई।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने फोन के रिकॉर्ड की भी जांच की। पुलिस के अनुसार, साजिश से जुड़े लोगों के बीच कुल 157 बार फोन पर बातचीत हुई थी। पुलिस का दावा है कि लगातार संपर्क में रहने वाले लोगों की भूमिका की जांच की गई और इसी आधार पर मामले में अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। फोन रिकॉर्ड और मोबाइल फोन से मिले फोटो को पुलिस ने जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है। हालांकि, इन साक्ष्यों की कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और अदालत के आदेशों के आधार पर होगा।
पुलिस जांच में फरीदीपुर स्थित एक मदरसे के मैनेजर मो. बिलाल हाशमी का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, बिलाल हाशमी मौलाना के करीबी थे और उन पर हत्या की साजिश के मुख्य सूत्रधार होने का आरोप है।
पुलिस की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि मौलाना के दो मदरसों और करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर कब्जे के उद्देश्य से उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई थी। यह आरोप फिलहाल पुलिस की जांच के दायरे में हैं। संपत्ति से संबंधित दावों और हत्या की साजिश में किसी व्यक्ति की भूमिका की अंतिम पुष्टि अदालत में उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी।
पुलिस के अनुसार, मौलाना की हत्या के लिए दो लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया है कि बिलाल हाशमी ने मो. सोहेल अहमद सिद्दीकी और फरहान सिद्दीकी के साथ मिलकर योजना तैयार की।
जांच के अनुसार, सोहेल अहमद सिद्दीकी और फरहान सिद्दीकी आपस में साले-बहनोई हैं। पुलिस का दावा है कि इनके जरिए अमन कुरैशी तक बात पहुंची और इसके बाद अमन ने शूटरों से संपर्क किया। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की जांच में छह लोगों की भूमिका सामने आई, जिसके बाद सभी को गिरफ्तार किया गया।
हजरतगंज पुलिस ने मामले में मो. बिलाल हाशमी, अमन कुरैशी, सोहेल अहमद, फरहान अहमद और दो शूटरों मोहम्मद शाहिद तथा मोहम्मद जमील को गिरफ्तार किया।
सभी छह आरोपियों को 21 अगस्त को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 की अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। मामले में इसके अगले ही दिन आरोपियों की जमानत से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया।
जेल भेजे जाने के करीब 24 घंटे बाद अमन कुरैशी, सोहेल अहमद और फरहान अहमद को जमानत मिल गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रभार पर बैठी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-3 की अदालत से जमानत मिली। 23 अगस्त को तीनों आरोपी जेल से बाहर आए।
रिहाई के बाद जेल के बाहर उनके समर्थकों द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत किए जाने का वीडियो सामने आया। इसमें वाहनों के काफिले के साथ स्वागत किए जाने का दृश्य बताया गया है। यह वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित होने के बाद मामले को लेकर लोगों का ध्यान फिर इस घटनाक्रम की ओर गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जमानत की सुनवाई के दौरान केस डायरी और पुलिस का पक्ष अदालत के सामने किस तरह रखा गया, इसको लेकर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि जमानत के लिए पेश किए गए दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी है। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश के बिना जमानत देने की प्रक्रिया को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
कानूनी तौर पर जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। जिन आरोपों के आधार पर गिरफ्तारी हुई है, उनकी अंतिम स्थिति साक्ष्यों और मुकदमे की सुनवाई के बाद तय होगी।
तीन आरोपियों को जमानत मिलने के बाद पुलिस की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जमानत निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है। पुलिस का फोकस उन साक्ष्यों पर रहेगा, जिनके आधार पर हत्या की साजिश का खुलासा करने और छह आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया गया है।
इसमें शूटरों द्वारा मौलाना की करीब एक महीने तक निगरानी, उनके मोबाइल फोन में मिली तस्वीरें, चोरी की मोटरसाइकिल, अवैध पिस्तौल और आरोपियों के बीच हुई 157 बार फोन बातचीत का रिकॉर्ड शामिल है।
मामले में पुलिस की अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार साजिश की जांच में कई स्तरों पर साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस के दावों में खास तौर पर दो शूटरों की गतिविधियां और उनसे बरामद सामान शामिल हैं।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में करीब एक महीने तक मौलाना की रेकी, मोबाइल फोन में उनकी तस्वीरें मिलने का दावा, चोरी की मोटरसाइकिल की बरामदगी, अवैध पिस्तौल बरामद होने की बात और 157 बार फोन पर बातचीत का रिकॉर्ड शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने दो लाख रुपये की सुपारी, मदरसों तथा संपत्तियों पर कब्जे से जुड़ी साजिश और छह आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही है।
मौजूदा घटनाक्रम में तीन आरोपियों को जमानत मिलने के बाद पुलिस अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, साजिश से जुड़े पुलिस के दावों की कानूनी जांच आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगी। मामले में पुलिस द्वारा बताए गए मोबाइल फोन के फोटो, फोन बातचीत के रिकॉर्ड, बरामद हथियार और अन्य सामग्री जांच का हिस्सा हैं। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।