देश के प्रख्यात इस्लामिक विद्वान, लेखक और शिक्षाविद मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी का सोमवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही देश और विदेश के धार्मिक, शैक्षणिक तथा सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी लंबे समय तक लखनऊ स्थित ऐतिहासिक इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम नदवतुल उलेमा से जुड़े रहे। यहां उन्होंने फैकल्टी ऑफ दावा के डीन के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। इस्लामी शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों में उनका योगदान व्यापक रूप से माना जाता रहा है।
यह खबर भी पढ़े - इलाज की चिंता सरकार करेगी- जनता दर्शन में कैंसर पीड़िता को सीएम योगी का भरोसा
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी को अरबी और उर्दू भाषाओं का गहरा विद्वान माना जाता था। उन्होंने इस्लामी विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं, जिन्हें भारत सहित विभिन्न देशों के शैक्षणिक और धार्मिक संस्थानों में संदर्भ सामग्री के रूप में देखा जाता है।
वे जमीयत शबाबुल इस्लाम के अध्यक्ष भी रहे और इस्लामी शिक्षा के प्रसार, युवाओं के मार्गदर्शन तथा विभिन्न धार्मिक एवं बौद्धिक विषयों पर अपने विचारों के लिए जाने जाते थे।
मौलाना के निधन की सूचना मिलने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों के उलेमा, शिक्षाविद, उनके शिष्यों और अनुयायियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके शैक्षणिक और धार्मिक योगदान को याद किया।
धार्मिक और शैक्षणिक समुदाय से जुड़े लोगों का मानना है कि उनके निधन से इस्लामी अध्ययन और अकादमिक जगत को एक अनुभवी विद्वान का साथ खोना पड़ा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी की नमाज-ए-जनाजा सोमवार को असर की नमाज के बाद अदा किए जाने की संभावना है। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में उलेमा, छात्र, अनुयायी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।