लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में अपने परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। मायावती ने कहा है कि आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी में कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके स्थान पर उनके भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विस्तृत बयान में कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित को पारिवारिक रिश्तों से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने इस फैसले के संदर्भ में बसपा संस्थापक कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के उदाहरणों का भी उल्लेख किया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ सप्ताह में बसपा के भीतर आकाश आनंद की संगठनात्मक भूमिका को लेकर कई फैसले हुए हैं। 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था। इसके बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से अलग किए जाने की घोषणा हुई। 12 सितंबर को मायावती ने आकाश और ईशान दोनों को संगठन में कोई पद नहीं देने की बात कही थी। अब ताजा बयान में उन्होंने ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही है।
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मायावती ने अपने ताजा बयान में कहा कि आनंद कुमार के परिवार के सदस्यों को पार्टी संगठन में आगे बढ़ाने को लेकर वह पिछले कुछ समय से विचार कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने विभिन्न पहलुओं पर विचार किया और अब निर्णय लिया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती के अनुसार, आकाश आनंद को पहले परिवार के आग्रह पर राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। लेकिन शादी के बाद उनकी गतिविधियों और रवैये को लेकर मायावती ने पार्टी हित का हवाला देते हुए उन्हें संगठन से अलग करने का फैसला किया। मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि आकाश उनके प्रभाव में हैं। यह मायावती का राजनीतिक आरोप है; स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार से अब केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईशान आनंद को लेकर भी कोई स्थायी गारंटी नहीं दी जा रही है। मायावती के मुताबिक, यदि भविष्य में ईशान आनंद पार्टी-विरोधी कोई गंभीर कृत्य करते हैं तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी में छोटी या बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय संगठन में काम कर रहे किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।
ईशान आनंद को लेकर मायावती का ताजा रुख पिछले दिनों के घटनाक्रम से अलग है। 3 सितंबर की बैठक के बाद ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद 12 सितंबर को मायावती ने कहा था कि उनके दोनों भतीजों—आकाश और ईशान—को पार्टी संगठन में कोई पद नहीं दिया जाएगा। उस समय उन्होंने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को भविष्य में संगठन में भूमिका दिए जाने की संभावना का उल्लेख किया था, बशर्ते वह पार्टी के प्रति निष्ठा, दक्षता और ईमानदारी साबित करें।
अब 20 सितंबर को मायावती ने अपने ताजा बयान में दीपिका को भी संगठनात्मक जिम्मेदारी से दूर रखने की बात कही है और ईशान आनंद को आगे बढ़ाने का निर्णय बताया है। इस तरह पिछले कुछ सप्ताह में बसपा संगठन में आनंद परिवार की भूमिका को लेकर कई बार बदलाव देखने को मिला है।
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मायावती ने परिवारवाद से जुड़े अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए बसपा संस्थापक कांशीराम का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी और उन्हें केवल निःस्वार्थ भाव से संगठन में काम करने की अनुमति दी।
मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपना परिवार नहीं बनाया और अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम से प्रेरणा लेकर उन्होंने भी अपना जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।
मायावती ने यह भी कहा कि महिला होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने भाई-बहनों में से किसी को अपने साथ रखना पड़ा और इसी क्रम में उनके छोटे भाई आनंद कुमार लंबे समय से उनके साथ काम कर रहे हैं।
मायावती ने बताया कि आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों के कारण उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा।
इससे पहले 3 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाते हुए कहा था कि वह फिलहाल उन्हें बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं देंगी। इसके बाद 9 सितंबर को उन्होंने आकाश की वापसी को उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक भविष्य से जोड़ते हुए बयान दिया था। 10 सितंबर को मायावती ने आकाश को पार्टी से पूरी तरह अलग करने की घोषणा की।
मायावती ने अपने ताजा बयान में भविष्य की स्थिति को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि ईशान आनंद भी भविष्य में पार्टी-विरोधी कोई गंभीर कृत्य करते हैं और उन्हें संगठन से बाहर करना पड़ता है, तो इसके बाद आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। ऐसी स्थिति में पार्टी संगठन में पहले से काम कर रहे किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने की बात मायावती ने कही है।
इस बयान के जरिए मायावती ने संगठन में पारिवारिक उत्तराधिकार की संभावना को एक व्यक्ति तक सीमित रखने और उसके बाद गैर-पारिवारिक कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने की अपनी शर्त भी स्पष्ट की है।
मायावती ने अपने फैसले के समर्थन में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पत्र 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइंस, नई दिल्ली से उनके पुत्र यशवंत बी. आंबेडकर को लिखा गया था। मायावती के अनुसार, पत्र में बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस से संबंधित कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर चेतावनी दी गई थी।
मायावती ने कहा कि आंबेडकर ने उस पत्र में स्पष्ट किया था कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है और उसे निजी संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, पत्र में निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में प्रेस से बाहर करने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
मायावती ने इस उदाहरण के जरिए यह तर्क रखा कि सार्वजनिक या संगठनात्मक जिम्मेदारी में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर संस्था और उसके हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मायावती ने अपने बयान में बताया कि देश और जनहित से जुड़े मुद्दों के साथ इस विशेष संगठनात्मक विषय पर विचार करने के लिए 23 सितंबर को बसपा की अखिल भारतीय बैठक बुलाई गई है।
लखनऊ में होने वाली यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पार्टी संगठन में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान कई बदलाव हुए हैं। 19 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, 23 सितंबर की बैठक एक महीने के भीतर पार्टी की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक होगी। इससे पहले 3 सितंबर को भी बसपा की राष्ट्रीय स्तर की बैठक हुई थी, जिसमें आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था।
बैठक में संगठन के कामकाज और पार्टी के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा होने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक गतिविधियों में पूरी ताकत से जुटने की अपील की है।
अपने बयान के अंत में मायावती ने कहा कि पूरा बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उन्होंने बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से सशक्त करने और उसके हित व कल्याण को अपने मिशन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में वह अपने भाई-बहनों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब बसपा में नेतृत्व, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर लगातार बदलाव हुए हैं। पार्टी की अगली अखिल भारतीय बैठक 23 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें इन संगठनात्मक घटनाक्रमों के बीच आगे की दिशा पर चर्चा होगी।