बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपने संगठन में जिम्मेदारियों का नया ढांचा तैयार किया है। पार्टी ने देश के विभिन्न राज्यों की संगठनात्मक गतिविधियों को तीन सेक्टर में बांटकर काम करने की योजना बनाई है। इस व्यवस्था में अलग-अलग नेताओं को राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
इस नए संगठनात्मक ढांचे में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जिम्मेदारी पार्टी प्रमुख मायावती खुद संभालेंगी। वहीं अन्य राज्यों के लिए भी नेताओं की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। बसपा ने अपने संगठन को तीन सेक्टर में बांटने का फैसला किया है। पार्टी के अनुसार इसका उद्देश्य संगठन को राज्यों में अधिक व्यवस्थित तरीके से सक्रिय करना और जनाधार बढ़ाने के लिए काम करना है।
सेक्टर-एक की निगरानी मायावती और लखनऊ स्थित केंद्रीय कार्यालय की ओर से की जाएगी। इस सेक्टर में 10 राज्यों को शामिल किया गया है। इन राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी रामजी लाल गौतम और सुरेश राव को दी गई है। वहीं सेक्टर-दो में नौ राज्यों को रखा गया है। इन राज्यों की जिम्मेदारी राजाराम और अतर सिंह राव को सौंपी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संगठन के तीसरे सेक्टर के लिए भी अलग स्तर पर जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इस नई व्यवस्था के तहत पार्टी अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान देगी।
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नई व्यवस्था में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को विशेष जिम्मेदारी के तहत मायावती खुद संभालेंगी। सेक्टर-एक की निगरानी भी मायावती और लखनऊ केंद्रीय कार्यालय से की जाएगी। उत्तर प्रदेश बसपा का प्रमुख संगठनात्मक आधार रहा है। ऐसे में राज्य की गतिविधियों की निगरानी पार्टी प्रमुख के स्तर पर किए जाने की जानकारी संगठन के नए ढांचे का अहम हिस्सा है। उत्तराखंड के संगठन की जिम्मेदारी भी मायावती के पास रहेगी। दोनों राज्यों में पार्टी की गतिविधियों को नए संगठनात्मक ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।
बसपा ने सेक्टर-एक में शामिल 10 राज्यों की जिम्मेदारी रामजी लाल गौतम और सुरेश राव को दी है। इन नेताओं को संबंधित राज्यों में संगठन की गतिविधियों की निगरानी और पार्टी के काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था में राज्यों के स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने और पार्टी के जनाधार से जुड़े कार्यों को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी ने राज्यों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग सेक्टर में बांटकर संगठनात्मक काम को स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ाने की व्यवस्था की है।
सेक्टर-दो में नौ राज्यों की जिम्मेदारी राजाराम और अतर सिंह राव को दी गई है। इस सेक्टर के तहत आने वाले राज्यों में दोनों नेता संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे। पार्टी की ओर से राज्यों में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इस तरह सेक्टर-एक और सेक्टर-दो में कुल 19 राज्यों की जिम्मेदारियां अलग-अलग नेताओं को सौंपी गई हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की निगरानी मायावती खुद करेंगी।
बसपा ने यह संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय किया है जब तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। नई व्यवस्था में राज्यों को सेक्टर के आधार पर बांटने और नेताओं को स्पष्ट जिम्मेदारी देने पर जोर दिया गया है। पार्टी का लक्ष्य संगठन को सक्रिय करते हुए विभिन्न राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाना है। इसके लिए राज्यों में पार्टी की गतिविधियों और संगठनात्मक कामकाज की निगरानी संबंधित जिम्मेदार नेताओं के माध्यम से की जाएगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में तीन राज्यों के नाम और वहां पार्टी की चुनावी रणनीति का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
बसपा के संगठनात्मक दायित्व संभालने के बाद ईशान आनंद के दौरे की भी जानकारी सामने आई है। वर्षा, आंधी और तूफान से प्रभावित राज्यों में ईशान आनंद के दौरे की संभावना बताई गई है। दायित्व संभालने के बाद यह उनका पहला दौरा होगा। इन प्रभावित क्षेत्रों में संगठन की स्थिति और लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। उपलब्ध जानकारी में ईशान आनंद के दौरे की निश्चित तारीख या प्रभावित राज्यों की पूरी सूची नहीं दी गई है।
मायावती ने बाढ़ और सूखे से प्रभावित राज्यों के किसानों को तत्काल मदद पहुंचाने की अपील की है। उन्होंने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए बसपा कार्यकर्ताओं को निर्देश देने की बात कही है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने को कहा गया है। इसमें बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसान भी शामिल हैं। पार्टी की ओर से सहायता कार्यों को लेकर कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर दिया गया है।
मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं को प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर लोगों के बीच से धन एकत्र करने से मना किया है। उन्होंने कहा कि सहायता के नाम पर कोई व्यक्ति नाजायज फायदा न उठा सके। इस निर्देश का उद्देश्य राहत और सहायता के नाम पर धन संग्रह से जुड़ी गतिविधियों को रोकना है। पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रभावित लोगों की मदद करने के साथ-साथ सहायता के नाम पर किसी तरह के अनुचित लाभ की स्थिति पैदा न होने देने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था में बसपा ने राज्यों के संगठनात्मक काम को अलग-अलग सेक्टर में बांटा है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार नेताओं की भूमिका निर्धारित की गई है। सेक्टर-एक में 10 राज्यों की जिम्मेदारी रामजी लाल गौतम और सुरेश राव को दी गई है, जबकि सेक्टर-दो में नौ राज्यों की जिम्मेदारी राजाराम और अतर सिंह राव को सौंपी गई है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जिम्मेदारी मायावती खुद संभालेंगी। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा प्रभावित राज्यों में संगठन की ओर से गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।