₹2,000 से अधिक के निर्धारित मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने के विरोध में मेरठ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष गौरव भाटी और महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बाजार से यूपीआई के जरिए पूजा सामग्री और अन्य सामान खरीदा।
इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता यह सामान लेकर मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अमित अग्रवाल के आवास पहुंचे। विधायक के घर पर मौजूद नहीं होने की जानकारी मिलने पर सामान उनके प्रतिनिधि को सौंपा गया। कांग्रेस नेताओं ने फोन पर विधायक से बातचीत कर यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर को लेकर अपना विरोध भी दर्ज कराया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के लिए बाजार से पूजा सामग्री और अन्य सामान यूपीआई के माध्यम से खरीदा। इसके बाद सामान लेकर भाजपा विधायक अमित अग्रवाल के आवास पर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, कार्यक्रम के जरिए डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को अलग तरीके से सामने रखने का प्रयास किया गया। उनका कहना था कि यूपीआई आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए रोजमर्रा के भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। विधायक की अनुपस्थिति में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खरीदा गया सामान उनके प्रतिनिधि को सौंप दिया। इसके साथ ही फोन पर विधायक से बातचीत कर एमडीआर को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई।
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केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए ढांचे में ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर एमडीआर नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा पात्र छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक, लगभग 96 प्रतिशत पी2एम यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के पी2एम यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाना है। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन रखी गई है। एनपीसीआई की व्यवस्था के अनुसार यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।
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वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर ग्राहक से वसूला जाने वाला यूपीआई लेन-देन शुल्क नहीं है। यह मर्चेंट भुगतान व्यवस्था के भीतर संबंधित पक्षों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार, एमडीआर कोई सरकारी कर नहीं है और न ही इसे सरकार या एनपीसीआई सीधे वसूल करता है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों, जिनमें बैंक और भुगतान एप्लीकेशन प्रदाता शामिल हैं, के बीच वितरित किया जाता है। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से यूपीआई भुगतान के लिए अलग से एमडीआर वसूलने की व्यवस्था नहीं है।
नए ढांचे में छोटे व्यापारियों को भी अलग प्रावधान के तहत राहत दी गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट यानी पी2पीएम श्रेणी के तहत यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को सभी लेन-देन पर शून्य एमडीआर का लाभ जारी रहेगा। इसमें सड़क किनारे सामान बेचने वाले और मोहल्ले की छोटी दुकानें भी शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि हर यूपीआई व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू नहीं होगा। शुल्क का प्रावधान निर्धारित श्रेणी और लेन-देन मूल्य के आधार पर लागू होगा।
जिला अध्यक्ष गौरव भाटी ने कहा कि यूपीआई को देश के आम नागरिकों के साथ छोटे और बड़े व्यापारियों ने भी व्यापक रूप से अपनाया है। उनके अनुसार, डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल, सुगम और कम लागत वाला बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। उनके मुताबिक, किसी भी अतिरिक्त लागत का असर व्यापारिक व्यवस्था पर पड़ सकता है और सरकार को इस विषय पर पुनर्विचार करते हुए व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए। महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने कहा कि कांग्रेस आम जनता और व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक को यूपीआई के माध्यम से खरीदी गई पूजा सामग्री और अन्य सामान उपहार के रूप में देकर सरकार तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया है कि कांग्रेस इस व्यवस्था का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि यूपीआई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि डिजिटल भुगतान की लागत का अनावश्यक भार व्यापारियों पर न पड़े।
केंद्र सरकार के अनुसार, एमडीआर सरकारी कर या सरकार अथवा एनपीसीआई द्वारा सीधे वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। इसका वितरण भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच किया जाता है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र के संचालन और उसके विस्तार को समर्थन देना है। सरकार के मुताबिक, व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी यूपीआई लेन-देन किसी भी राशि पर एमडीआर के दायरे में नहीं आएंगे। वहीं ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी शून्य एमडीआर के दायरे में रहेंगे।
नए ढांचे में कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग दर निर्धारित की गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्धारित क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेन-देन ₹5 का एमडीआर लागू होगा। इसके अलावा पूंजी बाजार से जुड़े कुछ निर्धारित लेन-देन के लिए 0.02 प्रतिशत एमडीआर की व्यवस्था है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन है। इस तरह नए ढांचे में सभी व्यापारी लेन-देन के लिए एक समान शुल्क व्यवस्था नहीं रखी गई है। भुगतान की राशि, व्यापारी की श्रेणी और संबंधित क्षेत्र के आधार पर नियम अलग हो सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान सय्यद आमिर रज़ा, राजू यादव, अरुण कौशिक, महेंद्र गुर्जर, सय्यद रेहानुद्दीन, सलीम खान, डॉ. प्रभात गौतम, योगी जाटव, अनिल अरोड़ा, राकेश कुशवाह, मोनिंदर सूद बाल्मीकी, के.डी. शर्मा, मासूम असगर, रोबिन नाथ गोलू, पीतांबर सिंह प्रजापति, सुनीता मंडल, रीना शर्मा, अफसा, सुशीला कोहली, संजय कटारिया, मतलूब, रविंदर सिंह, उवैस अंसारी, सय्यद तनवीर, उमरदराज, सोनू शर्मा, तेजपाल डाबका और राज केसरी समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।