मेरठ में पालतू कुत्ते टफ्फू की इंसानों की तरह तेरहवीं, बेटी 12 साल से बांधती थी राखी

14 Sep 2026

मेरठ। पालतू जानवर और इंसान के बीच लंबे समय में बनने वाले भावनात्मक जुड़ाव की एक घटना मेरठ में सामने आई है। यहां एक परिवार ने करीब 12 वर्षों तक अपने साथ रहे पालतू कुत्ते टफ्फू की मौत के बाद रविवार को उसकी तेरहवीं का आयोजन किया। परिवार ने हवन कराया और इसके बाद रिश्तेदारों तथा आसपास रहने वाले लोगों को प्रसाद वितरित किया।

परिवार ने टफ्फू की याद में उसकी पसंद के लड्डू भी बनवाए। परिजनों के मुताबिक, टफ्फू की 11 सितंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद परिवार का माहौल बदल गया और लगातार तीन दिनों तक घर में खाना नहीं बनाया गया। इसके बाद परिवार ने टफ्फू को दफनाया और रविवार को उसकी तेरहवीं की रस्म पूरी की।

रायबरेली निवासी सुनील यादव पिछले करीब 16 वर्षों से मेरठ में रह रहे हैं। वह डीएन इंटर कॉलेज में माली के पद पर कार्यरत हैं। उनके परिवार में पत्नी सुनीता, 18 वर्षीय बेटी वर्षा और 17 वर्षीय बेटा शिवम हैं। करीब 12 साल पहले डीएन इंटर कॉलेज परिसर में एक देसी नस्ल की डॉग ने टफ्फू को जन्म दिया था। सुनील यादव उसे अपने घर ले आए। इसके बाद टफ्फू परिवार के साथ ही रहने लगा और धीरे-धीरे घर के सदस्यों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया। परिवार के अनुसार, टफ्फू घर के प्रत्येक सदस्य की आवाज पहचानता था। वह परिचित और बाहरी लोगों के बीच भी अंतर समझता था। घर में किसी सदस्य के आने-जाने पर उसकी प्रतिक्रिया होती थी और परिचित लोगों को वह उनकी आवाज से पहचान लेता था।

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परिवार के मुताबिक, टफ्फू का नाम सुनील यादव की बेटी वर्षा ने रखा था। बचपन से ही वर्षा का टफ्फू के साथ गहरा लगाव था। समय के साथ दोनों के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता बन गया। वर्षा टफ्फू को अपने भाई की तरह मानती थी। परिवार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों से वह हर रक्षाबंधन पर टफ्फू को राखी बांधती थी। इस वर्ष भी वर्षा ने टफ्फू की कलाई पर राखी बांधी थी। वर्षा के मुताबिक, उसके दो भाई थे—एक छोटा भाई शिवम और दूसरा टफ्फू। वह बचपन से टफ्फू के साथ रही थी और उसके साथ बिताया समय उसके लिए महत्वपूर्ण था।

परिवार के अनुसार, टफ्फू केवल घर में रहने वाला पालतू जानवर नहीं था, बल्कि परिवार की रोजमर्रा की गतिविधियों का हिस्सा बन चुका था। परिवार में किसी सदस्य का जन्मदिन हो या कोई त्योहार, टफ्फू भी उस दौरान घर में मौजूद रहता था। घर में लोगों के आने-जाने पर भी वह प्रतिक्रिया देता था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह परिचित लोगों को उनकी आवाज से पहचान लेता था। लंबे समय तक परिवार के साथ रहने के कारण घर के सदस्यों की दिनचर्या में भी उसका एक स्थान बन गया था।

सुनील यादव के बेटे शिवम का भी टफ्फू के साथ बचपन से जुड़ाव रहा। परिवार के मुताबिक, करीब 12 वर्षों के दौरान दोनों ने काफी समय साथ बिताया। परिवार का कहना है कि टफ्फू घर में रहने वाले सभी सदस्यों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। इसलिए उसकी मौत के बाद घर के वातावरण में बदलाव महसूस हुआ और परिवार के सदस्य उसकी कमी महसूस करने लगे।

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परिवार के अनुसार, टफ्फू की तबीयत 11 सितंबर को बिगड़ी थी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। परिवार के सदस्य उसकी मौत से भावुक और दुखी थे। परिजनों के मुताबिक, लगातार तीन दिनों तक घर में खाना तक नहीं बनाया गया। टफ्फू की मौत के बाद परिवार ने उसे उसी स्थान पर दफनाया, जहां उसका जन्म हुआ था। परिवार के लिए यह स्थान उसके जीवन की शुरुआत से जुड़ा हुआ था।

टफ्फू को दफनाने के बाद परिवार ने रविवार को उसकी तेरहवीं का आयोजन किया। इस दौरान सुबह हवन कराया गया। इसके बाद रिश्तेदारों और आसपास रहने वाले लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। परिवार ने टफ्फू की पसंद के लड्डू भी बनवाए। तेरहवीं के आयोजन के दौरान परिवार ने उसके साथ बिताए लंबे समय और उससे जुड़ी यादों को भी याद किया।

परिवार के अनुसार, टफ्फू करीब 12 वर्षों तक उनके साथ रहा। इस दौरान वह परिवार के सदस्यों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। वर्षा का उसके साथ रिश्ता खास तौर पर भाई-बहन जैसा था और वह कई वर्षों से उसे रक्षाबंधन पर राखी बांधती आ रही थी। शिवम के लिए भी टफ्फू बचपन का साथी था। परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ भी उसका लंबे समय का जुड़ाव रहा। घर में होने वाले पारिवारिक आयोजनों और त्योहारों में उसकी मौजूदगी परिवार की दिनचर्या का हिस्सा थी। टफ्फू की मौत के बाद परिवार ने उसकी याद में हवन और तेरहवीं का आयोजन किया। परिवार ने उसकी पसंद के लड्डू बनवाए और रिश्तेदारों तथा पड़ोसियों को प्रसाद वितरित किया।