>सावन के पावन माह में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक विशेष और संदेशप्रद डाक कांवड़ यात्रा निकाली गई, जिसने न सिर्फ धार्मिक आस्था का संचार किया, बल्कि एक सांस्कृतिक मुहिम को भी हवा दी। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने इस यात्रा को अनोखे अंदाज़ में पेश किया और जोरदार नारे लगाए—"मुजफ्फरनगर नहीं, लक्ष्मीनगर चाहिए!"
>यह डाक कांवड़ सिर्फ हरिद्वार से गंगाजल लाने की यात्रा नहीं थी, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक संदेशवाहक अभियान था। इस यात्रा ने मुजफ्फरनगर का नाम बदलकर ‘लक्ष्मीनगर’ किए जाने की पुरज़ोर मांग को नए सिरे से आवाज दी।
>हिंदू युवा वाहिनी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रहलाद पाहुजा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने 151 लीटर गंगाजल हरिद्वार से लाकर शिव चौक पर भगवान शिव का अभिषेक किया। यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने "हर हर महादेव" के जयकारों के साथ क्षेत्रभर में पुष्पवर्षा की और "मुजफ्फरनगर नहीं, लक्ष्मीनगर" के पोस्टर-बैनर पूरे रास्ते भर लगाए।
>यात्रा का उद्देश्य केवल भक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह एक सांस्कृतिक शुद्धिकरण का प्रतीक भी बना। कार्यकर्ताओं ने रास्ते में गंगाजल का छिड़काव कर प्रतीकात्मक रूप से "नगर के शुद्धिकरण" का संदेश दिया।
>प्रहलाद पाहुजा ने कहा कि मुजफ्फरनगर का नाम एक ऐसे युग की याद दिलाता है जो भारतीय संस्कृति पर आक्रोश और अत्याचार से भरा था। उन्होंने कहा: "मुजफ्फरनगर नाम हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के खिलाफ है। यह समय है कि हम अपनी पहचान ‘लक्ष्मीनगर’ के रूप में पुनः स्थापित करें।" उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि जल्द से जल्द नगर का नाम बदलकर 'लक्ष्मीनगर' किया जाए।
>यात्रा में न सिर्फ हिंदू युवा वाहिनी बल्कि वाल्मीकि समाज के समाजसेवी गौहर वाल्मीकि भी शामिल हुए। उन्होंने फूल-मालाओं से कार्यकर्ताओं का स्वागत किया और इस सांस्कृतिक परिवर्तन की पहल को समर्थन दिया।