योगी सरकार का ऐतिहासिक कदम: ‘नक्शा’ पायलट योजना

10 Jun 2025


>शहरीकरण की तेज़ रफ्तार को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भूमि स्वामित्व को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू की गई ‘नक्शा’ पायलट योजना अब यूपी के 10 शहरी निकायों में लागू की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य शहरी भूमि रिकॉर्ड को सटीक, अद्यतन और डिजिटल बनाकर शहरी योजना, बुनियादी ढांचे के विकास और संपत्ति के लेन-देन को सुगम बनाना है।


>ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज़ जोशी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वर्ष 2024-25 में देशभर के 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की 157 शहरी स्थानीय निकायों में यह पायलट योजना शुरू की गई है।

उत्तर प्रदेश के चयनित 10 शहर इस प्रकार हैं:

1. टांडा (अम्बेडकर नगर)

2. नवाबगंज (बाराबंकी)

3. अनूपशहर (बुलंदशहर)

4. चित्रकूट धाम (चित्रकूट)

5. गोरखपुर

6. हरदोई

7. झांसी

8. चुनार (मिर्जापुर)

9. पुरनपुर (पीलीभीत)

10. तिलहर (शाहजहांपुर)


>जोशी ने बताया कि ‘नक्शा’ के अंतर्गत अत्याधुनिक हवाई और फील्ड सर्वे तकनीकों का उपयोग कर एक GIS-आधारित शहरी भूमि डेटा तैयार किया जा रहा है। यह पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ संपत्ति स्वामित्व में धोखाधड़ी को रोकने, विवादों के निपटारे को आसान बनाने, और नगर निकायों की राजस्व वसूली को भी बेहतर बनाएगा।


>उन्होंने कहा, “2021 में जहां यूपी की 22.27% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास कर रही थी, वह 2031 तक लगभग 40% होने की संभावना है। ऐसे में भूमि रिकॉर्ड की स्पष्टता शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जरूरी है।”

नक्शा’ योजना के लाभ:

संपत्ति स्वामित्व का स्पष्ट निर्धारण

धोखाधड़ी रहित रियल एस्टेट लेन-देन

शहरी नियोजन में तेजी

आपदा प्रबंधन और निवेश के लिए डेटा सपोर्ट

नगर निकायों की आय में वृद्धि


>जोशी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी भू-अभिलेखों को डिजिटल किया गया है। यूपी में रीयल-टाइम खतौनी, भू-मानचित्र और खसरा रिकॉर्ड, सभी को डिजिटाइज किया गया है। प्रत्येक भूखंड को यूपीएलपीआईएन (Geo-Aadhaar) नंबर दिया गया है जो उस भूखंड की भौगोलिक स्थिति से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि रिकॉर्ड को आधार से जोड़ने की योजना पर कार्य चल रहा है, जिससे एक क्लिक में पूरी संपत्ति की जानकारी मिल सकेगी।

जोशी ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक से ग्रामीण क्षेत्रों में भी भूमि सर्वे हो रहा है जिससे ग्रामीण नागरिक अपनी संपत्ति को आर्थिक साधन के रूप में उपयोग कर सकते हैं। यह योजना आर्थिक स्थिरता और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।