>राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2023 की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ दुष्कर्म, हत्या, अपहरण और एसिड अटैक जैसे गंभीर अपराधों में सबसे आगे है। अपराध दर के मामले में लखनऊ ने गाजियाबाद और कानपुर को भी पीछे छोड़ दिया है।
>राजधानी में अपराध का डरावना ग्राफ
>एनसीआरबी के मुताबिक, लखनऊ में 98 हत्या के मामले दर्ज हुए, जिनमें 101 लोग शिकार बने। वहीं दुष्कर्म के 151 मामले सामने आए। राजधानी में अपहरण की स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां 720 केस दर्ज हुए और 722 पीड़ित बने। एसिड अटैक जैसे घातक अपराध के 4 मामले भी लखनऊ से दर्ज हुए।
>इसके मुकाबले गाजियाबाद में हत्या के 45 केस और 33 अपहरण, जबकि कानपुर में 97 हत्या और 373 अपहरण दर्ज हुए। रिपोर्ट के मुताबिक अपराध दर गाजियाबाद में 1.9, कानपुर में 3.3 और लखनऊ में 3.4 रही।
>लापरवाही से मौतों में भी सबसे आगे लखनऊ
>एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, लापरवाही से हुई मौतों में भी लखनऊ सबसे आगे रहा। यहां 1,256 मामले दर्ज किए गए, जबकि कानपुर में 562 और गाजियाबाद में 181 मामले दर्ज हुए। गैर इरादतन हत्या के मामले भी लखनऊ में सबसे ज्यादा (28 केस, 36 पीड़ित) रहे।
>सरकार का पक्ष: "अपराध नियंत्रण में यूपी आगे"
>सरकार का दावा है कि NCRB रिपोर्ट का आकलन केवल संख्याओं के आधार पर नहीं होना चाहिए। यूपी सरकार का कहना है कि अपराध नियंत्रण और महिला सुरक्षा में प्रदेश ने ऐतिहासिक सुधार किए हैं।
>राज्य सरकार के अनुसार:
-
महिलाओं पर हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
-
पूरे प्रदेश में 2023 में सांप्रदायिक दंगों की संख्या शून्य रही, जो पहले कभी नहीं हुआ।
-
राष्ट्रीय स्तर पर प्रति एक लाख जनसंख्या पर औसतन 448 अपराध दर्ज होते हैं, जबकि यूपी में यह आंकड़ा घटकर 335 है।
>
>बड़ा सवाल
>भले ही सरकार आंकड़ों को लेकर अपनी उपलब्धियां गिना रही हो, लेकिन NCRB की रिपोर्ट साफ दिखाती है कि लखनऊ जैसे बड़े शहरों में अपराध का स्तर खतरनाक है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि राजधानी और अन्य महानगरों में अपराध रोकने के लिए आगे क्या ठोस रणनीति अपनाई जाएगी?