बीजेपी को मिला नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, बिहार के नितिन नबीन बने पार्टी प्रमुख

14 Dec 2025


>भारतीय जनता पार्टी ने अपने नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा कर दी है। बिहार सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वह बीजेपी के इतिहास में कई अहम रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले पहले नेता बन गए हैं।


>पार्टी की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, 45 वर्षीय नितिन नबीन सिन्हा को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह बिहार से आने वाले पहले बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वह ऐसे पहले अध्यक्ष भी हैं, जिनका जन्म बीजेपी की स्थापना के बाद हुआ है। बीजेपी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी, जबकि नितिन नबीन का जन्म 1 सितंबर 1980 को हुआ था।


>नितिन नबीन उम्र के लिहाज से भी पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्षों में शामिल हो गए हैं। इससे पहले सभी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी की स्थापना से पहले जन्मे रहे हैं। पार्टी नेतृत्व के इस फैसले को संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।


>बीजेपी के इतिहास में नितिन नबीन 15वें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। पार्टी की स्थापना के बाद 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 1986 में लालकृष्ण आडवाणी दूसरे अध्यक्ष बने। 1991 में मुरली मनोहर जोशी को यह जिम्मेदारी मिली। 1993 और 2004 में एक बार फिर लालकृष्ण आडवाणी ने अध्यक्ष पद संभाला।


>1998 में कुशाभाऊ ठाकरे, 2000 में बंगारू लक्ष्मण और 2001 में जन कृष्णमूर्ति पार्टी अध्यक्ष बने। 2002 में वेंकैया नायडू, 2005 में राजनाथ सिंह और 2009 में नितिन गडकरी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके बाद एक बार फिर राजनाथ सिंह को जिम्मेदारी दी गई। अमित शाह के कार्यकाल के बाद 2020 में जेपी नड्डा पार्टी के 14वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। अब नितिन नबीन सिन्हा को 15वें अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है।


>बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका क्या होती है:


>बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी का मुख्य कार्यकारी होता है। वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठकों की अध्यक्षता करता है और संगठन की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा युवा मोर्चा, किसान मोर्चा सहित पार्टी की सहायक इकाइयों की नियुक्तियों में भी अध्यक्ष की भूमिका होती है। अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार का कम से कम 15 वर्षों से पार्टी का सदस्य होना अनिवार्य है। यह चुनाव राष्ट्रीय और राज्य परिषदों से गठित निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है और कोई भी व्यक्ति लगातार दो से अधिक कार्यकाल तक इस पद पर नहीं रह सकता।