नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से गिरावट का दौर जारी है। बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अपने हालिया उच्चतम स्तर से नीचे आ चुका है और व्यापक बाजार में गिरावट का असर कई शेयरों पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, बाजार की पूरी तस्वीर केवल प्रमुख इंडेक्स की चाल से समझना आसान नहीं है। निफ्टी में जहां इस साल के उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है, वहीं निफ्टी 500 में शामिल बड़ी संख्या में शेयर अपने-अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। यही अंतर बाजार में जारी गिरावट की गहराई को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
अगस्त की शुरुआत में निफ्टी ने 24,774 का स्तर छुआ था। इसके बाद बाजार में गिरावट शुरू हुई। सितंबर के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और अक्टूबर में भी बाजार की तस्वीर में खास बदलाव नहीं दिखा। दिए गए बाजार आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में निफ्टी में 7 प्रतिशत से अधिक का करेक्शन आया है। हालांकि, व्यापक बाजार यानी अलग-अलग शेयरों में गिरावट इससे कहीं ज्यादा रही है। निफ्टी का मौजूदा स्तर उसके इस साल के बताए गए ऑल टाइम हाई 26,325 से करीब 13 प्रतिशत नीचे है।
बाजार की गिरावट का एक महत्वपूर्ण पहलू निफ्टी 500 के शेयरों का प्रदर्शन है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 500 में शामिल 252 शेयर, यानी करीब 50.4 प्रतिशत, अपने उच्चतम स्तर से कम से कम 30 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रमुख इंडेक्स में गिरावट की तुलना में व्यापक बाजार के एक बड़े हिस्से में ज्यादा गहरी गिरावट दर्ज हुई है। इसी वजह से बाजार के मौजूदा रुझान को समझने में केवल निफ्टी या सेंसेक्स की चाल पर्याप्त नहीं मानी जाती। अलग-अलग शेयरों और सेक्टरों का प्रदर्शन भी बाजार की स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ये खबर भी पढ़े - फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी, पीएम मोदी ने 9/11 का किया जिक्र
शेयर बाजार में बियर मार्केट की एक सामान्य तकनीकी परिभाषा है। इसके तहत किसी प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स के हालिया उच्चतम स्तर से 20 प्रतिशत या उससे अधिक गिरने की स्थिति को बियर मार्केट माना जाता है। इस गणना के आधार पर निफ्टी में अभी 20 प्रतिशत की गिरावट नहीं आई है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी का ऑल टाइम हाई 26,325 है। इस स्तर से 20 प्रतिशत की गिरावट के बाद निफ्टी करीब 21,060 के स्तर पर आएगा। इस तकनीकी मानक के आधार पर 21,060 के आसपास का स्तर 20 प्रतिशत गिरावट की सीमा को दर्शाता है। मौजूदा आंकड़ों में निफ्टी अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है। इसलिए केवल इस मानक के आधार पर अभी 20 प्रतिशत की गिरावट पूरी नहीं हुई है।
मौजूदा बाजार की तस्वीर में सबसे महत्वपूर्ण अंतर निफ्टी और व्यक्तिगत शेयरों के प्रदर्शन के बीच दिखाई देता है। निफ्टी में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट है, लेकिन निफ्टी 500 के लगभग आधे शेयर अपने उच्चतम स्तर से 30 प्रतिशत या उससे अधिक नीचे हैं। आंकड़ों के मुताबिक शीर्ष 500 कंपनियों में से 252 शेयर इस स्तर की गिरावट दर्ज कर चुके हैं। यानी व्यापक बाजार में गिरावट का दायरा प्रमुख इंडेक्स की तुलना में ज्यादा बड़ा है।
इसी तरह की स्थिति में बाजार विश्लेषण में इंडेक्स के साथ-साथ बाजार की चौड़ाई, यानी कितने शेयर बढ़ रहे हैं और कितने गिर रहे हैं, को भी देखा जाता है। उपलब्ध आंकड़ों में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी इस साल महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज: करीब 25 प्रतिशत
- एचडीएफसी बैंक: करीब 27 प्रतिशत
- एचयूएल: करीब 20 प्रतिशत
- टीसीएस: करीब 35 प्रतिशत
- इंफोसिस: करीब 37 प्रतिशत
- मारुति: करीब 30 प्रतिशत
- हैवेल्स इंडिया: करीब 27 प्रतिशत
इन आंकड़ों से पता चलता है कि गिरावट केवल छोटी कंपनियों तक सीमित नहीं है। सूची में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी अपने ऊंचे स्तरों से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग शेयरों में गिरावट की वजह और अवधि अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक शेयर के प्रदर्शन को पूरे बाजार का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।
बाजार की तकनीकी स्थिति समझने के लिए 200-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज यानी 200-Day SMA भी एक महत्वपूर्ण संकेतक है। यह किसी शेयर या इंडेक्स के लंबे समय के मूल्य रुझान को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जब किसी इंडेक्स या उसके बड़ी संख्या में शेयरों का कारोबार 200-दिन के औसत स्तर से नीचे होने लगता है, तो तकनीकी विश्लेषण में इसे कमजोर दीर्घकालिक रुझान के संकेत के तौर पर देखा जाता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कई शेयर अपने ऊंचे स्तर से 20 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुके हैं, लेकिन निफ्टी में अभी उतनी गिरावट नहीं आई है कि उसे 20 प्रतिशत की तकनीकी सीमा के आधार पर बियर मार्केट कहा जाए।
मौजूदा बाजार में सभी सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आईटी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों के कई शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है। इसके विपरीत बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो और मेटल शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती ने प्रमुख इंडेक्स की गिरावट को सीमित रखने में भूमिका निभाई है। यही वजह है कि इंडेक्स की चाल और व्यापक बाजार के प्रदर्शन में अंतर दिखाई दे रहा है। निफ्टी में बड़ी कंपनियों के वजन और अलग-अलग सेक्टरों के योगदान के कारण कुछ मजबूत सेक्टर इंडेक्स की कुल गिरावट को प्रभावित कर सकते हैं।
जब प्रमुख इंडेक्स में 20 प्रतिशत की गिरावट नहीं होती, लेकिन बड़ी संख्या में व्यक्तिगत शेयर अपने उच्चतम स्तरों से काफी नीचे चले जाते हैं, तो बाजार की इस स्थिति का वर्णन करने के लिए कुछ बाजार टिप्पणियों में 'हिडन बियर मार्केट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यह बियर मार्केट की औपचारिक तकनीकी परिभाषा नहीं है। औपचारिक रूप से बेंचमार्क इंडेक्स में 20 प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट को बियर मार्केट की सामान्य सीमा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए मौजूदा स्थिति को समझने के लिए निफ्टी के स्तर के साथ-साथ निफ्टी 500 के शेयरों और सेक्टरों के प्रदर्शन को अलग-अलग देखना जरूरी है।
उपलब्ध आंकड़ों से बाजार की तीन अलग-अलग तस्वीरें सामने आती हैं। पहली, निफ्टी अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है। दूसरी, निफ्टी 500 के 252 शेयर अपने उच्चतम स्तर से कम से कम 30 प्रतिशत नीचे हैं। तीसरी, अलग-अलग सेक्टरों में गिरावट समान नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रमुख इंडेक्स में दर्ज गिरावट और व्यापक बाजार में मौजूद गिरावट की गहराई अलग हो सकती है। बियर मार्केट की तकनीकी सीमा के संदर्भ में निफ्टी का 20 प्रतिशत गिरना महत्वपूर्ण स्तर है। दिए गए आंकड़ों में निफ्टी अभी इस सीमा से ऊपर है।