नई दिल्ली में दक्षिण जिला पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत 300 से अधिक खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे हैं। पुलिस के अनुसार, इस अभियान के तहत मोबाइल फोन से संबंधित शिकायतों पर लगातार काम किया गया और तकनीकी जांच, उपलब्ध डिजिटल सूचनाओं के विश्लेषण तथा मैदानी स्तर पर किए गए प्रयासों के जरिए मोबाइल का पता लगाया गया। अभियान में दक्षिण जिले के सभी 15 पुलिस थानों की पुलिस टीमों ने काम किया। पुलिस के मुताबिक, मोबाइल फोन की तलाश और बरामदगी के लिए गठित टीमों ने शिकायतों के आधार पर लगातार कार्रवाई की। बरामद किए गए मोबाइल को संबंधित नागरिकों को लौटाने से पहले आवश्यक सत्यापन और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
ऑपरेशन विश्वास के तहत दक्षिण जिला पुलिस के सभी 15 पुलिस थानों की टीमों को मोबाइल फोन से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई में लगाया गया। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाकर उन्हें उनके सही मालिकों तक पहुंचाना था। मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए तकनीकी जांच के साथ उपलब्ध डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण किया गया। इसके अलावा पुलिस टीमों ने लगातार मैदानी स्तर पर भी प्रयास किए। इन प्रयासों के बाद 300 से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, किसी मोबाइल फोन की बरामदगी के बाद उसे सीधे संबंधित व्यक्ति को नहीं सौंपा गया, बल्कि पहले आवश्यक सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद फोन उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए।
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बरामद मोबाइल फोन को उनके मालिकों को सौंपने के लिए हौज खास स्थित एनसीयूआई सभागार में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-द्वितीय के साथ दक्षिण जिले के सभी सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान बरामद मोबाइल फोन संबंधित नागरिकों को सौंपे गए। पुलिस की ओर से बताया गया कि इन मोबाइल फोन की बरामदगी शिकायतों पर की गई कार्रवाई का हिस्सा थी और फोन सौंपने से पहले उनकी पहचान तथा आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया गया।
ऑपरेशन विश्वास में मोबाइल फोन का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। पुलिस टीमों ने उपलब्ध डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण किया और उसके आधार पर मोबाइल फोन की तलाश की। मोबाइल फोन के मामलों में शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित जानकारी पुलिस के पास उपलब्ध होती है। अभियान के दौरान इन्हीं उपलब्ध सूचनाओं और तकनीकी जांच का इस्तेमाल करते हुए पुलिस टीमों ने फोन का पता लगाने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, लगातार किए गए इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 300 से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए गए। इस कार्रवाई में दक्षिण जिले के सभी 15 पुलिस थानों की टीमें शामिल रहीं। अलग-अलग शिकायतों पर काम करते हुए टीमों ने मोबाइल फोन का पता लगाया और बरामदगी के बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित नागरिकों को सौंपा।
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मोबाइल फोन आज केवल संचार का साधन नहीं हैं। इनमें लोगों के व्यक्तिगत डेटा, जरूरी संपर्क, तस्वीरें, वीडियो और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी रहती हैं। ऐसे में मोबाइल फोन खोने के बाद संबंधित व्यक्ति को केवल एक उपकरण के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता। दक्षिण जिला पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन विश्वास के तहत बरामद किए गए मोबाइल फोन वापस मिलने से नागरिकों को अपने महत्वपूर्ण डेटा, यादों और जरूरी संचार तक फिर से पहुंच मिली।
पुलिस ने अभियान को नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग से जोड़ते हुए बताया कि मोबाइल फोन की बरामदगी और वापसी के लिए तकनीक, जांच और समन्वित प्रयासों का इस्तेमाल किया गया। बरामद मोबाइल फोन को उनके मालिकों को सौंपने से पहले उचित सत्यापन किया गया। पुलिस के अनुसार, आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही फोन संबंधित नागरिकों को वापस किए गए। इस प्रक्रिया का उद्देश्य बरामद मोबाइल फोन को सही व्यक्ति तक पहुंचाना था। पुलिस टीमों द्वारा बरामद किए गए फोन की पहचान और संबंधित दावों के सत्यापन के बाद उन्हें मालिकों को सौंपा गया। इस तरह अभियान के तहत बरामदगी के साथ-साथ मोबाइल फोन की सही व्यक्ति तक वापसी की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
दक्षिण जिला पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन विश्वास तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग की दिशा में किए गए प्रयासों का हिस्सा है। अभियान में शिकायतों पर कार्रवाई, तकनीकी जांच और मैदानी स्तर पर लगातार प्रयासों को जोड़ा गया। मोबाइल फोन वापस मिलने के बाद संबंधित नागरिकों को उनके उपकरण वापस मिले। पुलिस के अनुसार, अभियान का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए उनके खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस करना था। दक्षिण जिला पुलिस ने इस पहल को दिल्ली पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास मजबूत करने से जुड़ा प्रयास बताया है। पुलिस ने इसके संदर्भ में दिल्ली पुलिस के “दिल की पुलिस” संदेश का भी उल्लेख किया।