पंचायत सहायकों ने 5 मांगों पर दिया अल्टीमेटम, 7 सितंबर से आंदोलन की चेतावनी

24 Aug 2026

पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जिले के पंचायत सहायकों ने मानदेय बढ़ोतरी, स्थायीकरण समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित अल्टीमेटम ज्ञापन सौंपा। पंचायत सहायकों ने शासन से एक सप्ताह के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। यूनियन ने निर्णय नहीं होने की स्थिति में 7 सितंबर 2026 से लखनऊ के ईको गार्डेन में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

ज्ञापन में पंचायत सहायकों ने कहा कि इससे पहले 1 जून 2026 को मांग पत्र और अल्टीमेटम ज्ञापन शासन के समक्ष दिया गया था। इसके बाद 3 जून को पंचायत सहायक पंचायती राज विभाग के प्रमुख प्रतिनिधिमंडल की शासन स्तर पर प्रमुख सचिव पंचायती राज के साथ वार्ता हुई थी। यूनियन के अनुसार, उस वार्ता में मांगों के समाधान के लिए दो माह का समय मांगा गया था।

निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद मानदेय बढ़ोतरी, स्थायीकरण और अन्य मांगों के संबंध में कोई सकारात्मक आदेश जारी नहीं होने का हवाला देते हुए पंचायत सहायकों ने नया अल्टीमेटम ज्ञापन दिया है।

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पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन ने शासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मुख्यमंत्री से पंचायत सहायकों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने की मांग शामिल है। यूनियन का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याओं और मांगों को रखने का अवसर दिया जाए।

दूसरी प्रमुख मांग मानदेय में बढ़ोतरी की है। पंचायत सहायकों ने मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने वैकल्पिक रूप से कम से कम प्रदेश में निर्धारित न्यूनतम कुशल मजदूरी दर के बराबर मानदेय देने की मांग भी रखी है। तीसरी मांग संविदा व्यवस्था समाप्त करने और स्थायी सेवा नियमावली बनाने की है। यूनियन ने पंचायत सहायकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है।

चौथी मांग के तहत महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश देने के साथ स्थानांतरण और समायोजन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। यूनियन ने कहा है कि महिला कर्मचारियों से जुड़ी इन सुविधाओं को व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए।

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पांचवीं मांग आगामी ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती से संबंधित है। पंचायत सहायकों ने अपने अनुभव और कार्य के आधार पर इस भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की मांग की है। यूनियन ने इसे पंचायत सहायकों के अनुभव को भर्ती प्रक्रिया में स्थान देने से जुड़ी मांग के रूप में शासन के सामने रखा है।

ज्ञापन के माध्यम से शासन से कहा गया है कि पंचायत सहायकों की पांचों मांगों पर एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक निर्णय लिया जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर के पंचायत सहायक आंदोलन करेंगे।

यूनियन के अनुसार, प्रस्तावित आंदोलन 7 सितंबर 2026 से लखनऊ स्थित ईको गार्डेन में शुरू किया जाएगा और यह अनिश्चितकालीन होगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि आंदोलन का आह्वान पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश के स्तर से किया गया है।

मांगों को लेकर पंचायत सहायकों की ओर से दिए गए ज्ञापन में पिछली गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 1 जून 2026 को पहले मांग पत्र और अल्टीमेटम ज्ञापन के माध्यम से शासन का ध्यान मांगों की ओर आकर्षित किया गया था।

इसके दो दिन बाद 3 जून को पंचायत सहायक पंचायती राज विभाग के प्रमुख प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव पंचायती राज के साथ शासन स्तर पर वार्ता हुई थी। यूनियन के मुताबिक, इस दौरान मांगों के समाधान के लिए दो महीने का समय मांगा गया था। पंचायत सहायकों का कहना है कि समय सीमा समाप्त होने के बावजूद मांगों पर सकारात्मक आदेश जारी नहीं हुआ, जिसके बाद दोबारा अल्टीमेटम ज्ञापन सौंपा गया।

पंचायत सहायकों की मांगों में सबसे प्रमुख मुद्दे मानदेय और सेवा व्यवस्था से जुड़े हैं। यूनियन ने एक ओर 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग रखी है, वहीं दूसरी ओर संविदा व्यवस्था समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली बनाने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है।

इसके अलावा महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश, स्थानांतरण और समायोजन की सुविधा तथा भविष्य की ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में अनुभव के आधार पर 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। यूनियन ने इन मांगों को एक साथ शासन के सामने रखा है।