एक पैलेट और हमेशा के लिए जा सकती है आंखों की रोशनी! जंतर-मंतर हिंसा के बाद डॉक्टरों ने बताया कितना बड़ा है खतरा

01 Aug 2026

नई दिल्ली। जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को लगी कथित पैलेट चोटों के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल और उससे होने वाले नुकसान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पैलेट गन से लगी चोट की गंभीरता केवल छर्रों की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि छर्रे शरीर के किस हिस्से में लगे, कितनी दूरी से फायरिंग हुई और उनकी गति कितनी थी।

एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुधीर गुप्ता ने बताया कि यदि पैलेट आंख, चेहरा, गर्दन, छाती या अन्य संवेदनशील अंगों पर लगे तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कुछ मामलों में आंखों की रोशनी प्रभावित होने या महत्वपूर्ण अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचने की आशंका भी रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार पैलेट गन से एक साथ बड़ी संख्या में छोटे धातु या प्लास्टिक के छर्रे निकलते हैं। यही कारण है कि एक ही फायरिंग में शरीर के कई हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। यदि फायरिंग कम दूरी से की जाए तो छर्रे त्वचा को भेदते हुए मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं तक गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि चोट का प्रभाव व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, फायरिंग की दूरी और प्रभावित अंग के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

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20 जुलाई को नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के पैलेट गन से घायल होने के आरोप लगाए गए थे। इस घटना के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल और उससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों पर बहस तेज हो गई। दावा किया गया कि कई छात्रों के चेहरे, आंख, गर्दन, सीने, हाथ और पैरों में पैलेट जैसी चोटें आईं।

इनमें नजफगढ़ निवासी 19 वर्षीय साहिल लोछाब की दाहिनी आंख में गंभीर चोट लगने का दावा किया गया, जिसके बाद उसकी आंख की रोशनी प्रभावित होने की आशंका जताई गई। वहीं गुरुग्राम निवासी 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी के चेहरे, गर्दन और शरीर में कई छर्रे लगने का आरोप लगाया गया। एक अन्य घायल 25 वर्षीय प्रशांत के दाहिने हाथ में भी पैलेट जैसी चोट लगने का दावा किया गया है।

सर्वोदय अस्पताल के आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. निखिल वालसंगकर के अनुसार यदि पैलेट से नसें, रक्त वाहिकाएं, हड्डियां या शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो जाएं तो कई मामलों में नुकसान की भरपाई संभव नहीं होती। ऐसे मरीजों को लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ सकती है और कई बार एक से अधिक सर्जरी भी करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि उपचार की प्रक्रिया पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि शरीर का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है और चोट कितनी गहरी है।

यथार्थ अस्पताल की सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी सिंघल के अनुसार पैलेट की चोट से कुछ मामलों में अंधापन, लंबे समय तक दर्द, जोड़ों में जकड़न और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इनमें पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) जैसी स्थिति भी शामिल हो सकती है।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. वंदना प्रकाश ने कहा कि हिंसक घटनाओं में घायल हुए लोगों पर मानसिक प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है और कई मरीजों को मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में धंसे हर पैलेट को निकालना आवश्यक नहीं होता। उपचार का तरीका मरीज की स्थिति, पैलेट की स्थिति और चोट की गंभीरता को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। डॉक्टर संक्रमण से बचाव, टिटनेस का टीका, नियमित चिकित्सकीय जांच और विशेष रूप से आंख की चोट के मामलों में लंबे समय तक फॉलोअप की सलाह देते हैं।