प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी दलों पर तीखे राजनीतिक हमले देखने को मिले। करीब 29 मिनट 20 सेकेंड के इस भाषण में कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा जिक्र समाजवादी पार्टी का किया गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के शुरुआती मिनटों में ही समाजवादी पार्टी का नाम लिया और पूरे भाषण के दौरान विभिन्न संदर्भों में उसका उल्लेख करते रहे। कुल मिलाकर उन्होंने सपा का 10 बार जिक्र किया।
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने संकेतों में उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 से 2017 के बीच रही सपा सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि सपा के पास अपनी छवि सुधारने का अवसर था, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सकी।
प्रधानमंत्री ने सपा को परिवारवादी पार्टी बताते हुए महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सपा ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों का विरोध किया, जिससे उसकी छवि पर असर पड़ा।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने राम मनोहर लोहिया का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा उनके विचारों से दूर हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षाओं के अनुरूप भूमिका नहीं निभाई।
भाषण में अन्य क्षेत्रीय दलों का भी उल्लेख हुआ। आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस का छह बार और डीएमके का सात बार जिक्र किया, जबकि कांग्रेस का उल्लेख सबसे अधिक 58 बार किया गया।
इससे पहले लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने अखिलेश यादव का नाम लेते हुए उन्हें “मित्र” बताया था। वहीं, मतदान से पहले केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और अखिलेश यादव के बीच बातचीत की भी जानकारी सामने आई थी।