नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। बैठक में दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और चीन के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने की आवश्यकता दोहराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तीन आपसी बातों पर जोर दिया। इनमें आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित शामिल हैं। बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। दोनों पक्षों की ओर से संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता जरूरी है।
भारत-चीन संबंधों में सीमा का मुद्दा महत्वपूर्ण विषय रहा है। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और दोनों पक्षों के बीच बनी समझ का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति वाले समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक दृष्टिकोण और भारत तथा चीन के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए व्यक्त की गई। बैठक में सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास पर भी चर्चा हुई।
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दोनों नेताओं ने भारत और चीन के लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया। बैठक में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया। इसके अलावा व्यावसायिक संबंधों और दोनों देशों के लोगों की आवाजाही को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने लोगों के बीच संपर्क को द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में आर्थिक और व्यापारिक संबंधों से जुड़े मुद्दे भी उठे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। इन चिंताओं में संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। बैठक में सार्थक और अनुमानित बाजार पहुंच को आसान बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में दोनों पक्षों ने संबंधित चिंताओं को दूर करने और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी सहमति के क्षेत्रों को लगातार बढ़ाने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के दायरे को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की सफलता में चीन के योगदान की सराहना की।
विदेश मंत्रालय की सचिव सुधाकर दलेला ने ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़े घटनाक्रम पर प्रेस ब्रीफिंग में भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स सदस्यों का 18वां सत्र समाप्त हुआ है और भारत के लिए ब्रिक्स अध्यक्षता का यह साल महत्वपूर्ण रहा। भारत ने इस साल जनवरी में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी।
यह वर्ष ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग की 20वीं वर्षगांठ का भी पड़ाव रहा। इस संदर्भ में भारत ने पिछली अध्यक्षता के काम को आगे बढ़ाते हुए अपनी अध्यक्षता की थीम के तहत मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया। विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में बताया गया कि भारत की कोशिश ब्रिक्स सहयोग को अधिक व्यावहारिक, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और लोगों की प्राथमिकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने की रही।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विभिन्न विषयों, मंत्रालयों, कार्य समूहों, व्यापारिक सत्रों और लोगों पर केंद्रित गतिविधियों एवं पहलों के तहत 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इनमें कुछ बैठकें आमने-सामने और कुछ वर्चुअल तरीके से आयोजित की गईं। ब्रीफिंग में कहा गया कि इन गतिविधियों में व्यापक भागीदारी ने ब्रिक्स के महत्व और विकासशील दुनिया तथा ग्लोबल साउथ के साथ इसके बढ़ते जुड़ाव को रेखांकित किया।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि शिखर सम्मेलन इस पूरी प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा था और भारत की अध्यक्षता के दौरान आठ महीने तक विभिन्न स्तरों पर लगातार गतिविधियां हुईं। 12 सितंबर को दक्षिण सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र दिवस के रूप में मनाए जाने का भी ब्रीफिंग में उल्लेख किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका पर चर्चा के लिए यह एक उपयुक्त पृष्ठभूमि रही।
ब्रिक्स बैठक के दौरान नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन दोहराया। इसमें विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार की जरूरत का भी समर्थन किया गया। इसका उद्देश्य विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज को अधिक मजबूती देने से जुड़ा बताया गया। बैठक में जारी संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने बातचीत, कूटनीति और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान के मुद्दे पर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि ब्रिक्स में स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान पर कुछ समय से चर्चा चल रही है और यह कोई नया विषय नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, स्थानीय मुद्रा में निपटान को आपसी व्यापार में लेनदेन की लागत कम करने के एक व्यावहारिक तरीके के तौर पर देखा गया है। इसे वैश्विक भुगतान और निपटान प्रणाली के पूरक के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गई। ब्रीफिंग में कहा गया कि इससे देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से रखी गई नई दिल्ली घोषणा को सभी सदस्य देशों ने स्वीकार किया। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। पीएम मोदी ने कहा कि बैठक सार्थक और रचनात्मक रही तथा इसमें साझा प्रतिबद्धता सामने आई। उन्होंने बदलती दुनिया की जरूरतों के संदर्भ में वैश्विक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। बैठक में दक्षिण एशिया की भूमिका पर भी जोर दिया गया। नई दिल्ली घोषणा के स्वीकार किए जाने के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के दौरान विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच साझा रुख सामने आया।
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मौजूदा बैठक अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई दोनों नेताओं की पिछली बैठक के बाद हुई है। नई दिल्ली में हुई बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया। मौजूदा बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता, सीमा विवाद का समाधान, आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला, बाजार पहुंच और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे शामिल रहे। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई। साथ ही मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने और आपसी सम्मान, संवेदनशीलता तथा हित के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।