>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नगराम क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पोल्ट्री फार्म की आड़ में गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही थी। पुलिस ने इस ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सरगना शिवम यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जो युवाओं, खासतौर पर मेडिकल और मैनेजमेंट छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से नशे का आदी बना रहा था।
>नगराम-रायबरेली बॉर्डर पर स्थित 'शिवम पोल्ट्री फार्म' असल में नशे के कारोबार का अड्डा बन चुका था। एसीपी मोहनलालगंज रजनीश वर्मा के अनुसार, गिरोह के तार सिर्फ लखनऊ तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि रायबरेली, सुलतानपुर, बाराबंकी समेत कई जनपदों और आंध्र प्रदेश व उड़ीसा जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क में और भी सप्लायर शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है।
>पुलिस द्वारा शिवम के मोबाइल की गहन जांच में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। फोन में न केवल छात्र ग्राहकों की सूची है, बल्कि कुछ इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों से जुड़े सप्लायरों के नाम भी सामने आए हैं। गिरफ्तार आरोपी शिवम, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश से खुद गांजा लाकर उसे आधा किलो से लेकर छोटी पुड़ियों में पैक कर, युवाओं तक सप्लाई करता था।
>एसीपी ने यह भी बताया कि लखनऊ के दक्षिणी क्षेत्र में पांच सक्रिय ड्रग सप्लायर पुलिस रडार पर हैं, जिनमें शहीद पथ के बिजनौर क्षेत्र का सूरज (सुलतानपुर निवासी) और दो सप्लायर बाराबंकी के बताए जा रहे हैं। पुलिस की टीमें लोकेशन ट्रेसिंग के जरिए इनकी तलाश में जुटी हुई हैं। फिलहाल शिवम को जेल भेज दिया गया है और गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए लगातार दबिशें जारी हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे नशे का नेटवर्क शिक्षण संस्थानों और युवाओं को निशाना बनाकर समाज को खोखला करने की साजिश रच रहा है।