नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक पुराना किला में हाल ही में झील की ओर स्थित एक बुर्ज के ढहने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने स्मारक की सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किले के समीप विकसित झील का पानी स्मारक की नींव, दीवारों या अन्य संरचनात्मक हिस्सों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है या नहीं।
एएसआई के अनुसार अध्ययन के दौरान किले की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति, मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल स्तर, नमी और आसपास के पर्यावरणीय कारकों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर आगे की संरक्षण रणनीति तय की जाएगी।
कुछ समय पहले झील की दिशा में स्थित पुराना किला का एक बुर्ज अचानक ढह गया था। घटना के बाद स्मारक की संरचनात्मक मजबूती और संरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद एएसआई ने वैज्ञानिक स्तर पर पूरे क्षेत्र का अध्ययन कराने का निर्णय लिया।
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अब यह भी जांच की जाएगी कि बुर्ज गिरने की वजह केवल समय के साथ होने वाला प्राकृतिक क्षरण था या झील से जुड़े भू-वैज्ञानिक और जल संबंधी कारकों की भी इसमें कोई भूमिका रही।
एएसआई इस अध्ययन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की मदद ले रहा है। इसमें संरचनात्मक इंजीनियर, भू-वैज्ञानिक, जल विज्ञान विशेषज्ञ और स्मारक संरक्षण विशेषज्ञ शामिल होंगे।
विशेषज्ञ यह मूल्यांकन करेंगे कि झील के कारण जमीन की नमी, भूजल स्तर या मिट्टी की स्थिति में ऐसा कोई परिवर्तन तो नहीं हुआ जिससे ऐतिहासिक संरचना प्रभावित हो रही हो। यदि किसी प्रकार का जोखिम सामने आता है तो उसके अनुरूप संरक्षण संबंधी उपायों की योजना बनाई जाएगी।
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों और पुरातात्विक साक्ष्यों में पुराना किला के आसपास वर्तमान स्वरूप की झील का उल्लेख नहीं मिलता।
इतिहास के अनुसार किले की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर गहरी खाई बनाई गई थी। आवश्यकता पड़ने पर इस खाई में पानी भरा जाता था ताकि दुश्मन सीधे किले तक न पहुंच सकें। बाद के वर्षों में इस क्षेत्र का स्वरूप बदला और वर्तमान झील विकसित की गई।
वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान कई तकनीकी बिंदुओं का परीक्षण किया जाएगा। इनमें किले की नींव की वर्तमान स्थिति, दीवारों में नमी का स्तर, आसपास की मिट्टी की संरचना, भूजल स्तर में बदलाव, झील के पानी का संभावित प्रभाव, संरचनात्मक स्थिरता, संरक्षण की वर्तमान व्यवस्था इन सभी पहलुओं का संयुक्त विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
एएसआई का कहना है कि अध्ययन पूरा होने के बाद प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर आगे की संरक्षण रणनीति तैयार की जाएगी। यदि वैज्ञानिक जांच में झील और स्मारक की संरचना के बीच किसी प्रकार का संबंध सामने आता है तो उसी के अनुरूप संरक्षण और मरम्मत संबंधी कदम उठाए जाएंगे।