राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर सीएम योगी का पलटवार, रायबरेली में कांग्रेस पर साधा निशाना

24 Aug 2026

रायबरेली में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के नायक अवध केसरी राना बेनी माधव बख्श सिंह की 222वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका, भारतीय परंपरा और विरासत से जुड़े उनके बयानों तथा कांग्रेस की राजनीति को लेकर कई सवाल उठाए। कार्यक्रम में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान और उनके परिवारों के सम्मान की जरूरत पर भी जोर दिया। कार्यक्रम और मुख्यमंत्री की ओर से की गई टिप्पणियों की समकालीन रिपोर्टिंग भी उपलब्ध है।

राना बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम का केंद्र स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और अवध क्षेत्र के ऐतिहासिक नायकों का स्मरण था। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने समकालीन राजनीतिक मुद्दों को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान के संदर्भ में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए उनसे लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।

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मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि राहुल गांधी मनु और भारतीय परंपरा को समझना चाहते हैं तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों के पारस्परिक संबंधों को लेकर भारतीय परंपरा को व्यापक संदर्भ में देखने की बात कही।

योगी ने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन में मां, बहन, पत्नी या बेटी जैसे पारिवारिक संबंध महत्वपूर्ण होते हैं और ऐसे विषयों को एकतरफा तरीके से देखने के बजाय व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी और उस पर योगी की प्रतिक्रिया 24 अगस्त को रायबरेली में उनके संबोधन का प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रही।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत की परंपरा और विरासत को लेकर लगातार सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन इसके बावजूद वे भारत की परंपरा और विरासत की आलोचना को अपना अधिकार समझते हैं।

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योगी ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के बाहर प्रदेश को लांछित और अपमानित करते हैं तथा विदेश जाकर भारत की छवि खराब करते हैं। उन्होंने सेना के संदर्भ में भी राहुल गांधी पर टिप्पणी की और कहा कि सैनिक सीमा पर दुश्मनों से लड़ते हैं, जबकि राहुल गांधी उनसे प्रमाण मांगते हैं।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या और भगवान राम से जुड़े कांग्रेस के पुराने राजनीतिक रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को ऐसी दिशा में नहीं ले जाना चाहिए, जिससे आगे चलकर परिवार को अपने व्यवहार या बयानों के लिए माफी मांगनी पड़े।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जंतर-मंतर से जुड़े एक कथित विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि भारत की संवैधानिक संस्था हैं। उनके अनुसार प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल केवल व्यक्ति का अपमान नहीं माना जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में बाद में संबंधित बेटी और उसकी मां की ओर से शब्द वापस लेने तथा माफी मांगने का उदाहरण भी दिया।

योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर वर्तमान पीढ़ी के भविष्य को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत की विरासत और देश के भविष्य को क्यों नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से नेता प्रतिपक्ष के रूप में सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपेक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में राहुल गांधी अपनी जिम्मेदारियों से अलग हो गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाया और 1975 के आपातकाल का जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए अमेठी और रायबरेली को लेकर भी निशाना साधा। योगी ने कहा कि इन क्षेत्रों ने लंबे समय तक गांधी परिवार को राजनीतिक समर्थन दिया, लेकिन उनके अनुसार इसी परिवार की राजनीति के कारण क्षेत्र के सामने पहचान का संकट भी खड़ा हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जनता को तय करना है कि विकास के लिए उसे किस प्रकार की राजनीति और नेतृत्व की आवश्यकता है। रायबरेली मुख्यमंत्री की टिप्पणी का प्रमुख केंद्र रहा। समकालीन रिपोर्टों में भी कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी, मनुस्मृति और गांधी परिवार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से दर्ज किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने देश के कई स्मारकों और संस्थानों का नामकरण एक ही परिवार के नाम पर करने को प्राथमिकता दी, जबकि राना बेनी माधव बख्श सिंह, लालचंद स्वर्णकार और वीर पासी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को अपेक्षित स्थान नहीं मिला।

उन्होंने काकोरी ट्रेन एक्शन का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक काकोरी ट्रेन एक्शन को लूट की घटना बताती रही, जिससे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान हुआ।

योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों और अन्य महापुरुषों को सम्मान देने का प्रयास किया है। उन्होंने राम मंदिर के निर्माण के साथ महर्षि वाल्मीकि, गोस्वामी तुलसीदास, निषादराज और माता शबरी के सम्मान का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व वाले परिवार पर देश के विभाजन और उस समय हुई हिंसा की जिम्मेदारी से जुड़े राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया और इसके लिए उसे देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने वीर सावरकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए इन राष्ट्रनायकों को स्वीकार करने में कठिनाई रही।

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस की सरकारों ने कुछ ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के सम्मान के बजाय ऐसे लोगों को महत्व दिया जो अंग्रेजों के साथ जुड़े हुए थे। इन दावों को कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े क्रांतिकारी सचिंद्र नाथ बख्शी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी और बाद में आजादी के बाद वे मुक्त हुए।

योगी के अनुसार, सचिंद्र नाथ बख्शी ने बाद में भारतीय जनसंघ से जुड़कर वाराणसी दक्षिण से विधायक के रूप में काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बख्शी ने विधानसभा में अपने खिलाफ पैरवी करने वाले एक कांग्रेस नेता का उल्लेख किया था, जिसने कथित रूप से अंग्रेजों की मुखबिरी की थी। योगी ने कहा कि इसके बावजूद ऐसे व्यक्ति के नाम पर लखनऊ में सड़क का नामकरण किया गया, जबकि सचिंद्र नाथ बख्शी जैसे क्रांतिकारियों को भुला दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के कथित आचरण का उदाहरण देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से जुड़ा एक आरोप भी रखा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अयोध्या में हनुमानगढ़ी में दर्शन करने के बाद मछली की दावत की। योगी ने इसे कांग्रेस की धार्मिक आस्था से जुड़े कथित दोहरे आचरण का उदाहरण बताया। उन्होंने मंदिर और धार्मिक स्थलों पर सार्वजनिक रूप से श्रद्धा प्रदर्शित करने और उसके बाद अलग प्रकार का आचरण करने पर सवाल उठाया।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के भाई की हत्या का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि जिस माफिया पर हत्या का आरोप था, उसके खिलाफ आवाज उठाने के बजाय प्रदेश अध्यक्ष ने उसके सामने झुकने का काम किया। ये सभी आरोप मुख्यमंत्री के भाषण में कांग्रेस नेताओं को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

कार्यक्रम के मूल केंद्र के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राना बेनी माधव बख्श सिंह को 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का प्रमुख नायक बताया। उन्होंने कहा कि अवध क्षेत्र में 1857 के आंदोलन को राना बेनी माधव बख्श सिंह ने नेतृत्व दिया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को अपनी सेना का हिस्सा बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से राना बेनी माधव बख्श सिंह की स्मृति को नमन किया। उन्होंने मंगल पांडे, धन सिंह गुर्जर, नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, वीरा पासी, राजा माधव सिंह, राजा चंद्रिका बख्श सिंह, लालचंद स्वर्णकार, फतेह बहादुर और बसंत सिंह समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने राना बेनी माधव बख्श सिंह स्मारक के निर्माण की स्थिति की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्मारक के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री के मुताबिक परियोजना के लिए कुल 21 करोड़ रुपये का बजट था और करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने दूसरे चरण के काम में वीरा पासी और उनके सहयोगियों की प्रतिमाएं स्थापित करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए तथा ऐसे आयोजनों में उनके परिवारों को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाना चाहिए। सरकारी सूचना से जुड़े सार्वजनिक विवरण के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को रायबरेली में राना बेनी माधव बख्श सिंह की 222वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया और स्मृति सभागार से जुड़े आयोजन भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे।