22 वर्षीय युवा विज्ञानी राहुल सिंह की मौत का राज क्या छिपाए हैं कॉल रिकॉर्ड? कारोबारी से पूछताछ समेत कई पहलुओं की जांच में जुटी पुलिस

17 Jul 2026

लखनऊ। विभूतिखंड स्थित नोवोटेल होटल में युवा विज्ञानी राहुल सिंह का शव मिलने के मामले में लखनऊ पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब पुलिस केवल घटनास्थल तक सीमित न रहकर राहुल सिंह की कॉल डिटेल, मोबाइल चैट, बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन और बस्ती में दर्ज मुकदमे की पूरी पृष्ठभूमि की भी पड़ताल करेगी। परिवार की ओर से लगाए गए आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान नोएडा के व्यवसायी चंद्रभूषण मिश्रा और उनसे जुड़े विवादों की भी विस्तृत पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ड्रोन परियोजना और धनराशि के लेनदेन को लेकर दोनों पक्षों के बीच किस प्रकार का विवाद था और क्या उसका राहुल सिंह की मानसिक स्थिति पर कोई प्रभाव पड़ा था।

राहुल सिंह की मौत के बाद उनके परिवार ने लखनऊ पुलिस को दी गई तहरीर में नोएडा के व्यवसायी चंद्रभूषण मिश्रा, उनके परिवार के सदस्यों और एक पूर्व मुख्य सचिव सहित पांच लोगों पर आर्थिक एवं मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि इसी दबाव के कारण राहुल की मौत हुई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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पुलिस अब बस्ती में दर्ज मुकदमे की पूरी केस डायरी, विवेचना की प्रगति और राहुल सिंह के बयान से संबंधित अभिलेख मंगाकर उनका अध्ययन करेगी। अधिकारियों का मानना है कि दोनों मामलों के तथ्यों का मिलान करने के बाद ही घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

जांच एजेंसियां राहुल सिंह के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन का विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मौत से पहले राहुल किन लोगों के संपर्क में थे, उनकी बातचीत किस विषय पर हुई थी और हाल के दिनों में उनके वित्तीय लेनदेन का स्वरूप क्या था।

अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों की जांच से घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसी आधार पर आगे की पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

प्रारंभिक जांच के अनुसार राहुल सिंह और नोएडा के व्यवसायी चंद्रभूषण मिश्रा की मुलाकात एक प्रदर्शनी के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच ड्रोन परियोजना को लेकर निवेश और धनराशि का लेनदेन शुरू हुआ।

पुलिस अब यह स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है कि परियोजना के संचालन, निवेश और धनराशि की वापसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच किस स्तर का विवाद था। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि क्या इस विवाद का राहुल सिंह पर मानसिक प्रभाव पड़ा था।

लखनऊ पुलिस का कहना है कि परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और स्पष्ट तहरीर के आधार पर की जाएगी।

डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा के अनुसार, परिवार की ओर से दी गई तहरीर में कुछ बिंदु स्पष्ट नहीं हैं। विस्तृत और स्पष्ट तहरीर मिलने के बाद उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

महराजगंज जिले के सिसवा निवासी 22 वर्षीय युवा विज्ञानी राहुल सिंह सोमवार को विभूतिखंड स्थित नोवोटेल होटल में ठहरे थे। मंगलवार सुबह काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर होटल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कमरे का दरवाजा खुलवाया तो राहुल सिंह का शव बिस्तर पर मिला।

मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी अब तक कोई संदिग्ध तथ्य सामने नहीं आया है। हालांकि, मौत के कारणों की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजा गया है।

परिवार का आरोप है कि ड्रोन परियोजना के लिए लिए गए लगभग 85 लाख रुपये की वापसी को लेकर राहुल सिंह पर लगातार आर्थिक और मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। इसी मामले में नोएडा के व्यवसायी चंद्रभूषण मिश्रा ने जून महीने में बस्ती में राहुल सिंह के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था।

अब लखनऊ पुलिस यह जांच कर रही है कि मुकदमे, वित्तीय लेनदेन और राहुल सिंह की मौत के बीच कोई तथ्यात्मक संबंध है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।