वंदे मातरम पर कांग्रेस के रुख को राजनाथ सिंह ने बताया असंवैधानिक और निंदनीय

21 Aug 2026

वंदे मातरम को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम का सम्मान करने से औपचारिक रूप से इनकार करना या उसका सीधे विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण होने के साथ-साथ संवैधानिक दृष्टि से गंभीर विषय है।

राजनाथ सिंह ने अपने बयान में संसद, संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और संसद से पारित कानून सभी लोगों के लिए बाध्यकारी होते हैं। उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति या संस्था किसी संवैधानिक रूप से स्वीकार्य व्यवस्था को मानने से इनकार करती है, तो संविधान के प्रति उसकी निष्ठा पर सवाल उठ सकता है। राजनाथ सिंह ने वंदे मातरम के सम्मान को देशभक्ति से भी जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान से इनकार करने की स्थिति में देशभक्ति पर सवाल खड़े होते हैं।

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के रुख को सीधे तौर पर “सर्वथा असंवैधानिक” और “निंदनीय” बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने का कांग्रेस का निर्णय राजनीतिक दृष्टि से भी भविष्य में गंभीर संकट पैदा करने वाला हो सकता है।

कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम का सम्मान करने से औपचारिक रूप से न केवल इंकार करना, बल्कि सीधे सीधे विरोध करना, अत्यंत दुर्भाग्य जनक और संवैधानिक दृष्टि से बहुत गंभीर विषय है। भारत के संविधान के अनुसार, संसद देश का सर्वोच्च संस्था है और संसद से पारित कोई भी क़ानून हर व्यक्ति के लिये… pic.twitter.com/3B87SW8dSd

— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 21, 2026

 

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के इस रुख ने उसके “नासमझी भरे खतरनाक इरादों” को देश के सामने ला दिया है। हालांकि ये सभी बातें राजनाथ सिंह के बयान का हिस्सा हैं और कांग्रेस की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

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राजनाथ सिंह ने अपने बयान में संसद की संवैधानिक भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और संसद से पारित कानूनों का पालन हर व्यक्ति के लिए बाध्यकारी है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि यदि कोई किसी कानून या संवैधानिक व्यवस्था को मानने से इनकार करता है तो उसकी संविधान के प्रति निष्ठा संदेह के घेरे में आ सकती है।

वंदे मातरम के संदर्भ में भी उन्होंने इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान से इनकार किए जाने की स्थिति को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। राजनाथ सिंह ने अपने बयान में वंदे मातरम के सम्मान को देशभक्ति से जोड़ते हुए कहा कि यदि कोई राष्ट्रगीत का सम्मान करने से मना करता है तो उसकी देशभक्ति पर भी सवालिया निशान लग जाता है।

यह बयान वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद के उस पहलू को सामने लाता है, जिसमें राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और राजनीतिक रुख को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनाथ सिंह ने इस विषय को केवल राजनीतिक मतभेद नहीं बल्कि संवैधानिक और राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया।

रक्षा मंत्री ने अपने बयान में 1937 के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसके आधार पर कांग्रेस वंदे मातरम को लेकर अपने तत्कालीन रुख की बात करती है। राजनाथ सिंह का आरोप है कि वर्ष 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के आगे झुकते हुए यह प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि उस निर्णय का खामियाजा देश को बाद में विभाजन के रूप में भुगतना पड़ा।

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उन्होंने इसी ऐतिहासिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कट्टरपंथी तत्वों के आगे समझौता करना हमेशा देश के लिए घातक साबित हुआ है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 1937 की घटनाओं और कांग्रेस के तत्कालीन फैसले की राजनाथ सिंह द्वारा दी गई व्याख्या उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है।

राजनाथ सिंह ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति की तुलना 1937 के प्रसंग से करते हुए कांग्रेस पर एक बार फिर कट्टरपंथी तत्वों के आगे समर्पण करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस आज भी इसी प्रकार का रुख अपना रही है तो यह देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। राजनाथ सिंह के अनुसार, कांग्रेस का मौजूदा निर्णय केवल वंदे मातरम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और संवैधानिक प्रभाव भी हैं। उन्होंने इस निर्णय को देश के भविष्य से जुड़ा विषय बताया।

राजनाथ सिंह के बयान में वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के रुख को राजनीतिक निर्णय के रूप में भी संबोधित किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय राजनीतिक दृष्टि से भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

उन्होंने वंदे मातरम के विरोध को कांग्रेस की राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए कहा कि इससे उसके इरादे देश के सामने स्पष्ट हो गए हैं। हालांकि उपलब्ध जानकारी में कांग्रेस की ओर से इस आरोप या बयान का कोई उत्तर शामिल नहीं है। इसलिए इस रिपोर्ट में कांग्रेस की प्रतिक्रिया के संबंध में कोई दावा नहीं किया जा रहा है।

राजनाथ सिंह के बयान में मुख्य रूप से चार मुद्दे सामने आते हैं। पहला, वंदे मातरम के सम्मान का सवाल। दूसरा, संसद और संविधान की सर्वोच्चता का मुद्दा। तीसरा, 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव की राजनीतिक व्याख्या। और चौथा, वर्तमान कांग्रेस के रुख को देश के भविष्य से जोड़ना। रक्षा मंत्री ने इन सभी बिंदुओं को एक-दूसरे से जोड़ते हुए कांग्रेस के निर्णय की आलोचना की और इसे असंवैधानिक तथा निंदनीय बताया।