दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 में हुई हर्ष फायरिंग की घटना से जुड़े मामले में बिहार के साहिबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 304 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी मानते हुए हिरासत में लेने का आदेश दिया। वहीं उनकी पत्नी रेनू सिंह समेत तीन अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात का है, जब दिल्ली के बसंत कुंज स्थित एक फार्महाउस में न्यू ईयर पार्टी आयोजित की गई थी। पार्टी के दौरान कथित हर्ष फायरिंग में आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए राजू कुमार सिंह और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भीड़भाड़ वाले माहौल में लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाना यह दर्शाता है कि आरोपी को इस बात की जानकारी थी कि इस तरह की कार्रवाई से किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है। अदालत ने माना कि इस प्रकार की फायरिंग लापरवाहीपूर्ण आचरण की श्रेणी में आती है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने विधायक राजू कुमार सिंह को:
- आईपीसी की धारा 304 (भाग-2)
- आर्म्स एक्ट की धारा 30
के तहत दोषी करार दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाने के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में लेने का आदेश भी दिया।
मामले में आरोपी बनाई गईं राजू कुमार सिंह की पत्नी रेनू सिंह, राना राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को अदालत ने बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य इन तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
इस मामले में वर्ष 2023 में अदालत ने राजू कुमार सिंह, उनकी पत्नी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। उस समय अदालत ने प्रथम दृष्टया यह माना था कि राजू कुमार सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 तथा आर्म्स एक्ट के तहत मामला बनता है। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी और अब अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया है।