राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, जानिए पूरा मामला

29 Jun 2026

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि मामले में इतनी जल्दबाजी की आवश्यकता क्या है। न्यायालय ने कहा कि अदालत खुलने के बाद मामले पर सुनवाई की जाएगी। ऐसे में अब इस याचिका पर 12 जुलाई के बाद सुनवाई होने की संभावना है।

याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर की गई है। इसमें राम मंदिर चढ़ावा मामले में एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई की निगरानी में एसआईटी गठित कर कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा प्रशासनिक स्तर पर लगाए गए अन्य आरोपों की जांच कराने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और मामले में देरी होने से जांच प्रभावित हो सकती है। याचिका में यह भी आशंका जताई गई कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो कथित तौर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तत्काल सुनवाई के लिए याचिका में ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं दिखाई गई है, जिसके आधार पर इसे प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध किया जाए।

याचिका में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने किसी एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज किए बिना ही जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। याचिकाकर्ता ने इसे प्रक्रिया संबंधी मुद्दा बताते हुए न्यायालय से एफआईआर दर्ज कराने और सीबीआई की अगुवाई में नई एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया है। ध्यान देने योग्य है कि ये आरोप याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और इन पर न्यायालय की ओर से अभी कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

राम मंदिर चढ़ावा मामले में लगाए गए आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। सरकारी स्तर पर गठित इस जांच दल ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। हालांकि रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इसी बीच, समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जांच के सिलसिले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान पुलिस ने दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें अनिल मिश्रा का नाम भी शामिल है, के बयान भी आगे दर्ज किए जा सकते हैं।