राम मंदिर चढ़ावा जांच में अब नया मोड़! फिर अयोध्या जाएगी एसआईटी, ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से हो सकती है पूछताछ

13 Jul 2026

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) जल्द ही दोबारा अयोध्या पहुंच सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान जांच दल ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, दान प्रबंधन व्यवस्था से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकता है। इसके साथ ही अतिरिक्त दस्तावेजों की जांच कर अब तक सामने आए तथ्यों का सत्यापन भी किया जाएगा।

यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई थी। उस समय एसआईटी ने स्पष्ट किया था कि जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसी क्रम में एक जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया, ताकि शेष बिंदुओं पर विस्तृत जांच पूरी की जा सके।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब दान प्रबंधन से जुड़े अभिलेखों, नकद चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा करेगी। इसके अलावा ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है।

सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में नकद चढ़ावे की गिनती के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के बार-बार उल्लंघन के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या निगरानी व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी के कारण कथित गबन की घटना संभव हुई।

जांच एजेंसियों ने अब मामले की वित्तीय पड़ताल को भी व्यापक कर दिया है। पुलिस ने आरोपियों की आय, बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों और निवेश से जुड़ी जानकारी आयकर विभाग, विभिन्न बैंकों, तहसील कार्यालयों और उप-पंजीयक कार्यालयों से मांगी है।

इसके अलावा अयोध्या जिले से बाहर स्थित संभावित संपत्तियों का भी सत्यापन किया जा रहा है। जांचकर्ता यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि कहीं आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों या सहयोगियों के नाम पर कोई निवेश या संपत्ति तो नहीं खरीदी। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान जुटाए जा रहे ये अभिलेख अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों का हिस्सा बन सकते हैं।

पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में लगभग 80 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त बाद में की गई तलाशी के दौरान और नकदी तथा आभूषण भी जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियां बरामद धन और अन्य साक्ष्यों का रिकॉर्ड तैयार कर उनके स्रोतों का मिलान कर रही हैं।

जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। अब ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, गोपाल राव और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की पहचान के आधार पर पहले जारी किए गए अति विशिष्ट (वीवीआईपी) पास पर श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के अपने पदों से हटने के बाद ऐसे पास जारी करने के लिए उपयोग किए जाने वाले पहचान-पत्र निष्क्रिय कर दिए गए हैं। इसके चलते पहले जारी सभी संबंधित पास स्वतः अमान्य हो गए हैं।

इस बीच पुलिस ने मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों की सात दिन की पुलिस रिमांड की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों की पुष्टि, वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने और अन्य साक्ष्य जुटाने के लिए रिमांड आवश्यक है। अदालत ने पुलिस के आवेदन पर सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।

अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े ट्रस्ट के कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां आरोपियों और उनके रिश्तेदारों से जुड़े बैंक लेन-देन, निवेश और संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की भी जांच कर रही हैं, ताकि कथित धन के प्रवाह और उससे जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि की जा सके।