ई-पंजीकरण और रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों को निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को अंबेडकरनगर की पुरानी तहसील परिसर में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडरों ने धरना देकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कई दशकों से अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक और स्टांप वेंडर रजिस्ट्री संबंधी कार्यों का संचालन करते आ रहे हैं। यदि इस व्यवस्था को निजी कंपनियों को सौंप दिया गया तो इससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस निर्णय का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो वर्षों से इस पेशे से जुड़े हुए हैं।
धरने में शामिल लोगों ने आशंका जताई कि निजी कंपनियों के आने के बाद रजिस्ट्री और ई-पंजीकरण से जुड़ी सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। इसके कारण आम लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए निजीकरण ही एकमात्र विकल्प नहीं है। उनका कहना था कि सरकार को मौजूदा ई-पंजीकरण प्रणाली को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
धरने में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि निजीकरण के बाद जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार कर लोगों को बेहतर सुविधाएं दी जा सकती हैं। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन में विनोद तिवारी, अभय श्रीवास्तव, आदर्श श्रीवास्तव, गुड्डू श्रीवास्तव, घिराऊलाल, विजयसेन, चिंतामणि, ओमप्रकाश चौबे, राम सिंह, गिरजाशंकर गुप्ता, मायाराम यादव, प्रदीप शुक्ला, पंकज, रुस्तम, शुभम तिवारी, आशुतोष विश्वकर्मा, विवेक सिंह, शशिकांत तिवारी और अभयभूषण दूबे समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता और स्टांप वेंडर मौजूद रहे।