यूपी से खत्म होगा दिल का ये ‘खामोश कातिल’, एसजीपीजीआई की ऐतिहासिक पहल

12 Jul 2025

लखनऊ। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई है। उत्तर प्रदेश अब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ रूमेटिक हृदय रोग (RHD) के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया है। "आरएचडी रोको पहल" का नेतृत्व लखनऊ स्थित एसजीपीजीआईएमएस कर रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार और स्टैनफोर्ड बायोडिज़ाइन का सहयोग शामिल है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नवाचार की मिसाल

11 जुलाई, 2025 को एसजीपीजीआई लखनऊ में आयोजित वैज्ञानिक सलाहकार समिति (SAC) की बैठक में इस महाअभियान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने रणनीति बनाई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा ने की, जबकि संचालन पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन, प्रो. आदित्य कपूर और प्रो. एस.के. अग्रवाल की वरिष्ठ टीम ने किया।

तकनीक और स्वास्थ्य का संगम

इस पहल में AI-सक्षम डिजिटल स्टेथोस्कोप, सरल मौखिक प्रश्नावली, और इकोकार्डियोग्राफी जैसे नवाचारों का समावेश है, जिनकी मदद से प्राथमिक चरण में ही हृदय रोगों का पता लगाना संभव होगा। यह मॉडल पहले से ही SGPGI में सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है।

सामुदायिक स्वास्थ्य और प्रशिक्षण को मिलेगी गति

प्रो. एस.के. अग्रवाल ने ज़िला स्तर पर क्षमता निर्माण और समय पर रेफरल की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। डॉ. आदित्य कपूर ने बताया कि AI स्टेथोस्कोप (ट्राइकॉग) की सहायता से हृदय रोग की प्रारंभिक पहचान तेज़ी से की जा सकती है।

श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस अभियान को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जोड़ने का सुझाव दिया, जिससे स्कूली बच्चों तक सीधी पहुँच बनाई जा सके और स्थानीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।

आरएचडी के खिलाफ बहु-स्तरीय रणनीति

यह परियोजना चार स्तरों पर कार्य करेगी:

  1. मौखिक प्रश्नावली से शुरुआती स्क्रीनिंग

  2. AI-सक्षम डिजिटल स्टेथोस्कोप से मर्मर की पहचान

  3. इकोकार्डियोग्राफी द्वारा पुष्टिकरण जांच

  4. तृतीयक देखभाल के लिए SGPGI को रेफरल

यह पहल राज्यभर के DEICs, PHCs और CHCs में नैदानिक प्रोटोकॉल तैयार करने, प्रशिक्षण देने और कार्यान्वयन की निगरानी का कार्य करेगी।