दिन-रात मरीजों की सेवा, फिर भी ₹12 हजार स्टाइपेंड; आरएमएल के डॉक्टरों ने उठाई आवाज

03 Aug 2026

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें ₹12 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि प्रदेश के अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में रेजिडेंट डॉक्टरों को लगभग ₹30 हजार प्रतिमाह तक स्टाइपेंड मिल रहा है। उन्होंने अपने स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह किए जाने की मांग की है।

ज्ञापन में रेजिडेंट डॉक्टरों ने कहा है कि वे संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इमरजेंसी, बाह्य रोगी विभाग, वार्ड, गहन चिकित्सा इकाई और रात्रिकालीन ड्यूटी सहित विभिन्न जिम्मेदारियां वे लगातार निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों की तुलना में काफी कम है।

डॉक्टरों का कहना है कि समान कार्य करने के बावजूद अलग-अलग संस्थानों में स्टाइपेंड में बड़ा अंतर होना उचित नहीं है। उन्होंने इस व्यवस्था की समीक्षा कर समान सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई के बीच किराया, भोजन, परिवहन और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन ₹12 हजार प्रतिमाह के स्टाइपेंड में करना कठिन होता जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में यह राशि जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने शासन से अनुरोध किया है कि स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक रूप से बेहतर सहयोग मिल सके।

रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी सेवाएं, गंभीर मरीजों का उपचार, गहन चिकित्सा इकाई, वार्ड तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने दी जाएंगी। डॉक्टरों ने कहा कि उनका उद्देश्य मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी मांग को शासन तक पहुंचाना है।

रेजिडेंट डॉक्टरों ने कहा कि प्रदेश के अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों के समान स्टाइपेंड उन्हें भी मिलना चाहिए। उनका कहना है कि समान कार्य करने वाले सभी डॉक्टरों के लिए समान आर्थिक व्यवस्था लागू होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगा और इस संबंध में उचित निर्णय लेगा।

ज्ञापन में डॉक्टरों ने यह भी उल्लेख किया है कि यदि उनकी मांग पर लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो वे आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।